Punjab Teachers Non-Academic Duty Relief: शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से राहत, सरकार के आदेश का खुलकर स्वागत
BLO समेत गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से राहत, अब पढ़ाई पर पूरा फोकस करेंगे शिक्षक
Punjab Teachers Non-Academic Duty Relief: पंजाब सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और छात्रों के शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा व महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जारी किए गए ताजा निर्देशों के अनुसार, सरकारी स्कूलों—विशेष रूप से ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’—के शिक्षकों को अब गैर-शैक्षणिक कार्यों (नॉन-टीचिंग/एक्स्ट्रा ड्यूटीज) से मुक्त रखा जाएगा। सरकार के इस फैसले से अध्यापकों और स्कूल प्रशासनों में खुशी की लहर है। शिक्षकों और प्रिंसिपलों ने इसे शिक्षा हित में उठाया गया एक अत्यंत दूरगामी और सराहनीय कदम करार दिया है।
शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल अध्यापन: प्रिंसिपल मनदीप कौर
स्कूल ऑफ एमिनेंस, माल रोड (अमृतसर) की प्रिंसिपल मनदीप कौर ने इस निर्णय पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों से कोई भी गैर-शैक्षणिक ड्यूटी न ली जाए। उन्होंने बताया कि उनके स्कूल के लगभग 8 से 10 शिक्षक बीएलओ (BLO) और एसआईआर (SIR) जैसी ड्यूटियों में लगे हुए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चुनाव व अन्य राष्ट्रीय कार्य भी महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को इससे छूट मिलने से छात्रों की पढ़ाई को सीधा और बड़ा फायदा होगा। परीक्षाओं के नजदीक होने के कारण शिक्षक अब कक्षा में रहकर विद्यार्थियों की पढ़ाई और नतीजों को सुधारने में पूरा समय दे सकेंगे।
कक्षा में निरंतरता टूटने से गिरता है शिक्षा का स्तर
स्कूल ऑफ एमिनेंस में पिछले 14 वर्षों से कार्यरत शिक्षिका मनदीप कौर ने बताया कि जब अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए स्कूल से बाहर भेजा जाता है, तो शिक्षक और छात्र के बीच की निरंतरता (कंटिन्यूटी) टूट जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार शिक्षक कई दिनों या हफ्तों तक स्कूल से बाहर रहते हैं। ऐसे में कक्षा में चल रहे विषयों का क्रम टूट जाता है, जिससे बच्चों का पढ़ाई से ध्यान भटकता है और उनका मोटिवेशन व रुचि कम हो जाती है। खासकर टर्मिनल और फाइनल परीक्षाओं के समय जब छात्रों को रिवीजन और शिक्षक के मार्गदर्शन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, शिक्षकों की अनुपस्थिति का सीधा असर परीक्षा परिणामों पर पड़ता है। सरकार का यह आदेश इस बड़ी खामी को दूर करेगा।
शिक्षकों की उपस्थिति से ही संभव है विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास
बायोलॉजी की लेक्चरर प्रतिभा मिश्रा और इंग्लिश लेक्चरर सादर शर्मा ने भी इस कदम की भरपूर प्रशंसा की। प्रतिभा मिश्रा ने कहा कि एक शिक्षक की मुख्य जिम्मेदारी कक्षा में छात्रों से संवाद स्थापित करना और उन्हें पढ़ाना है। गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से मुक्ति मिलने के बाद शिक्षक पूरी एकाग्रता के साथ अपना काम कर सकेंगे।
वहीं सादर शर्मा ने जोर देकर कहा कि कई बार 80 से 90 प्रतिशत तक स्टाफ बाहरी ड्यूटियों पर चला जाता है, जिससे स्कूल का माहौल और बच्चों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक और मानसिक सहयोग की भी जरूरत होती है, जो केवल एक शिक्षक की व्यक्तिगत उपस्थिति (फेस-टू-फेस टीचिंग) से ही संभव है। शिक्षक मौजूद रहेंगे तभी बच्चे गलत दिशा में जाने से बचेंगे और देश को योग्य नागरिक व नेतृत्व मिल सकेगा।
समस्त शिक्षक वर्ग ने सरकार के इस संवेदनशील फैसले का स्वागत करते हुए इसे शिक्षा सुधार की दिशा में मील का पत्थर बताया है।
