स्कूल छोड़ा, नौकरी छोड़ी और मक्खन बेचने से शुरू किया सफर, आज 1000 करोड़ से ज्यादा की कंपनी

नई दिल्ली : कहते हैं कि मुश्किल हालात इंसान की राह रोकने के बजाय उसे आगे बढ़ने का हौसला भी दे सकते हैं। GRB Dairy Foods के फाउंडर जीआर बालासुब्रमण्यम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने महज 13 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया और काम की तलाश में बेंगलुरु चले गए। आगे चलकर मक्खन के कारोबार से शुरुआत की और आज उनकी कंपनी का रेवेन्यू 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया जाता है। कंपनी के प्रोडक्ट्स अब 40 देशों में मौजूद हैं।

13 साल की उम्र में छोड़ना पड़ा स्कूल

जीआर बालासुब्रमण्यम तमिलनाडु के पलानी के छोटे से गांव चिन्ना कराट्टुपट्टी में छह बच्चों वाले परिवार में पले-बढ़े। उनके पिता किसान थे और एग्री प्रोडक्ट्स को साइकिल से गांव-गांव जाकर खरीदने और बेचने का काम करते थे।

आर्थिक परिस्थितियों के कारण बालासुब्रमण्यम ने 13 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी और काम के लिए बेंगलुरु चले गए। वहां उन्होंने अपने बहनोई की मक्खन की दुकान पर करीब 14 साल तक काम किया। इसी दौरान उन्होंने डेयरी कारोबार को करीब से समझा।

नौकरी का अनुभव कैसे बना कारोबार की नींव?

बालासुब्रमण्यम ने बहनोई के कारोबार में काम करते हुए मक्खन खरीदने, बेचने और बाजार की जरूरतों को समझा। यही अनुभव बाद में उनके अपने कारोबार में काम आया। यानी उन्होंने जिस क्षेत्र में नौकरी की, उसी क्षेत्र के अनुभव को आगे चलकर अपने बिजनेस मॉडल में इस्तेमाल किया।

सिर्फ 6 हजार रुपये से शुरू किया मक्खन का कारोबार

करीब 14 साल नौकरी करने के बाद बालासुब्रमण्यम ने कुछ अपना करने का फैसला किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय उनके पास करीब 6,000 रुपये की बचत थी। उन्होंने इसी रकम से मक्खन का कारोबार शुरू किया और यहीं से GRB Dairy Foods की नींव पड़ी।

उन्होंने शुरुआत में छोटे उत्पादकों से मक्खन खरीदकर उसे बेंगलुरु में बेचने का काम शुरू किया। कारोबार की शुरुआत एक छोटे से कमरे से हुई थी।

मक्खन से घी बनाने का आइडिया आया काम

कारोबार शुरू करने के बाद बालासुब्रमण्यम के सामने एक बड़ी समस्या थी—मक्खन जल्दी खराब हो जाता था। उन्होंने इस समस्या का समाधान खोजते हुए मक्खन से घी बनाकर उसे पैकेट में बाजार में उतारने का फैसला किया।

इस बदलाव ने उनके कारोबार को नया रास्ता दिया। मक्खन की जगह घी के रूप में उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने से कारोबार को आगे बढ़ाने का मौका मिला।

मक्खन को घी में बदलना क्यों अहम था?

मक्खन की तुलना में घी को लंबे समय तक सुरक्षित रखना आसान होता है। ऐसे में मक्खन को घी में बदलने का फैसला कारोबार के लिए व्यावहारिक साबित हुआ। बालासुब्रमण्यम ने एक मौजूदा समस्या को पहचानकर उसी के भीतर कारोबारी अवसर तलाशा।

चिट फंड से जुटाई रकम, कारोबार को दिया विस्तार

अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए बालासुब्रमण्यम ने एक चिट फंड कंपनी भी स्थापित की। इसका तरीका उन्होंने अपने बहनोई के कारोबार से सीखा था।

उन्होंने अपने परिचित लोगों को चिट फंड का मॉडल समझाया और एक ग्रुप तैयार किया। इससे जुटाई गई रकम का इस्तेमाल उन्होंने अपने मक्खन कारोबार में किया। इसके बाद कारोबार बढ़ने लगा और धीरे-धीरे आय तथा कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ती गई।

1991 में बेंगलुरु में पहली फैक्ट्री

कारोबार बढ़ने के बाद GRB Dairy Foods की पहली फैक्ट्री 1991 में बेंगलुरु में खोली गई। इसके बाद कंपनी ने डिंडीगुल और होसुर में भी प्लांट लगाए।

कंपनी ने पैकेज्ड घी के अलावा दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया। इसके साथ ही कारोबार का विस्तार लगातार होता गया।

आज 40 देशों में मौजूद हैं GRB के प्रोडक्ट्स

GRB Dairy Foods की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के हवाले से पता चला है कि कंपनी का रेवेन्यू अब 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

कंपनी के प्रोडक्ट्स दुनिया के 40 देशों में मौजूद हैं और इसके पोर्टफोलियो में 70 से ज्यादा डेयरी उत्पाद शामिल हैं। एक छोटे कमरे से शुरू हुआ कारोबार अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है।

Success Story

जीआर बालासुब्रमण्यम की कहानी में सबसे अहम बात यह है कि उन्होंने अपने शुरुआती अनुभव को कारोबार के अवसर में बदला। पहले उन्होंने डेयरी कारोबार में लंबे समय तक काम करके उसकी बारीकियां समझीं, फिर सीमित पूंजी से अपना काम शुरू किया।

इसके बाद उन्होंने मक्खन के जल्दी खराब होने की समस्या का समाधान घी के रूप में निकाला और धीरे-धीरे अपने कारोबार को फैक्ट्री तथा अलग-अलग डेयरी उत्पादों तक विस्तार दिया। आज GRB Dairy Foods का कारोबार 40 देशों तक पहुंच चुका है।

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