रामपुर में मनरेगा महिला मेटों ने उठाई मांगों की आवाज, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
रामपुर में मनरेगा महिला मेट ग्रामीण विकास समिति ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मासिक मानदेय, 20 श्रमिकों की सीमा हटाने, मस्टर रोल में महिला मेट की भूमिका और कार्य व्यवस्था से जुड़ी मांगें उठाईं।
रामपुर। मनरेगा महिला मेट ग्रामीण विकास समिति, उत्तर प्रदेश से जुड़ी महिला मेटों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रामपुर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में महिला मेटों के मानदेय, कार्य व्यवस्था और कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार समेत कई मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है।
महिला मेटों का कहना है कि ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से गरीब महिलाओं को मनरेगा में महिला मेट के पद पर चयनित किया गया है। इसके बावजूद कई स्थानों पर उन्हें अपने दायित्वों के निर्वहन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक और पंचायत सचिव द्वारा कई बार महिला मेटों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और उन्हें कार्य से दूर रखने का प्रयास किया जाता है।
मानदेय और श्रमिकों की संख्या बढ़ाने की मांग
महिला मेटों ने मांग की है कि सभी मनरेगा महिला मेटों के लिए मासिक मानदेय लागू किया जाए। इसके साथ ही 20 श्रमिकों से संबंधित प्रतिबंध को हटाने की मांग भी की गई है, ताकि महिला मेटों को पर्याप्त कार्य मिल सके।
एक पंचायत में दूसरी महिला मेट के चयन पर रोक की मांग
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि जिस ग्राम पंचायत में पहले से महिला मेट कार्यरत है, वहां दूसरी महिला मेट के चयन पर रोक लगाई जाए। महिला मेटों का कहना है कि इससे पहले से कार्यरत महिला मेट के रोजगार और जिम्मेदारियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
मस्टर रोल में महिला मेट की भूमिका तय करने की मांग
महिला मेटों ने श्रमिकों के मस्टर रोल में उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया में महिला मेट की भूमिका सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। साथ ही महिला मेट के हस्ताक्षर को अनिवार्य किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
समिति ने महिला मेट से संबंधित निर्धारित पारदर्शी व्यवस्थाओं का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है। महिला मेटों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले में आवश्यक कार्रवाई करते हुए उनकी समस्याओं का समाधान कराने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की अपील की।
