महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर विवाद, CM फडणवीस बोले- ‘एक्सपर्ट बनने की जरूरत नहीं’

मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के अनिवार्य कार्यसाधक ज्ञान को लेकर विवाद बढ़ गया है। इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं है, बल्कि कामकाज के लिए जरूरी बुनियादी मराठी जानना पर्याप्त है।

ड्राइवरों को सिर्फ कामकाजी मराठी जाननी होगी

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ऑटो और टैक्सी चालकों से मराठी भाषा में विशेषज्ञता की उम्मीद नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि ड्राइवरों को केवल काम से संबंधित बुनियादी मराठी का ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ड्राइवरों को भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है और अब तक किसी का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है।

महाराष्ट्र मोटर व्हीकल नियमों में किया गया बदलाव

महाराष्ट्र सरकार ने Maharashtra Motor Vehicles Rules, 1989 में संशोधन कर व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी के कार्यसाधक ज्ञान को अनिवार्य किया है। इसमें ऐप आधारित सेवाओं जैसे Ola और Uber से जुड़े ड्राइवर भी शामिल हैं। तीन महीने की ग्रेस अवधि खत्म होने के बाद 20 अगस्त से इस नियम को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

पहले नोटिस, फिर लाइसेंस पर कार्रवाई

12 अगस्त के सरकारी प्रस्ताव के मुताबिक, जिन ड्राइवरों को मराठी का कार्यसाधक ज्ञान नहीं है, उन्हें भाषा सीखने के लिए एक महीने का नोटिस दिया जाना है। इसके बाद भी आवश्यकता पूरी नहीं होने पर लाइसेंस और बैज को निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद मराठी सीखने के लिए तीन महीने का और समय दिया जाएगा। नियमों का पालन नहीं होने पर आगे लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई का प्रावधान है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दी चेतावनी

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि एक महीने की नोटिस अवधि खत्म होने से पहले ड्राइवरों पर जुर्माना लगाने वाले RTO अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने यह भी कहा कि ड्राइवरों पर मराठी का कार्यसाधक ज्ञान नहीं होने के कारण 5,000 से 20,000 रुपये तक जुर्माने की बात को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही थी।

मुंबई के कई इलाकों में प्रदर्शन

भाषा नियम को लेकर मुंबई के कई इलाकों में ऑटो और टैक्सी चालकों ने विरोध प्रदर्शन किया। कांदिवली वेस्ट के लालजीपाड़ा में सोमवार सुबह करीब 9 बजे ड्राइवरों ने सड़क पर प्रदर्शन किया। इसके अलावा मालाड, सांताक्रूज, दहिसर और अंधेरी में भी प्रदर्शन की जानकारी सामने आई। ऑटो-रिक्शा चालकों के एक वर्ग ने सोमवार शाम से तीन दिन की हड़ताल भी शुरू की।

यात्रियों को भी हुई परेशानी

विरोध के बीच मुंबई में ऑटो और टैक्सी की उपलब्धता प्रभावित हुई। कुछ यात्रियों ने वाहन मिलने के लिए 40 से 50 मिनट तक इंतजार करने की शिकायत की। प्रदर्शन के दौरान कुछ अन्य ड्राइवरों को यात्रियों को ले जाने से रोकने और कुछ यात्रियों को वाहन से उतरने के लिए मजबूर करने के आरोप भी सामने आए।

1.65 लाख से ज्यादा ड्राइवरों ने की मराठी की क्लास

ड्राइवरों का कहना है कि वे मराठी सीखने के लिए तैयार हैं, लेकिन RTO जांच के दौरान पूछे जाने वाले कुछ सवाल सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिए गए पाठ्यक्रम से आगे के होते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त तक 1,268 व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों को नोटिस दिए गए थे। इसके बाद 21 अगस्त को महाराष्ट्र में 1,499 गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों को नोटिस जारी किए गए। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, 1,65,600 गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों ने मराठी की कक्षाओं में हिस्सा लिया है।

विवाद का मुख्य मुद्दा मराठी भाषा सीखने की अनिवार्यता और उसके पालन की प्रक्रिया है। सरकार का कहना है कि ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ नहीं बनना है, केवल कामकाज के लिए जरूरी बुनियादी भाषा ज्ञान होना चाहिए। वहीं, प्रदर्शन कर रहे कुछ ड्राइवरों की शिकायत है कि जांच के दौरान पूछे जाने वाले सवालों को लेकर उन्हें कठिनाई हो रही है। सरकार ने नोटिस और अतिरिक्त समय की व्यवस्था की है, जबकि नियमों के तहत आगे लाइसेंस पर कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।

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