नई दिल्ली: Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran के पद छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, Chandrasekaran ने अपने करीबी सहयोगियों के साथ कंपनी की 18 अगस्त 2026 को होने वाली Annual General Meeting (AGM) से पहले पद से हटने की संभावना पर चर्चा की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब AGM में उनके दोबारा डायरेक्टर नियुक्त होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
फरवरी 2027 तक है चेयरमैन का कार्यकाल
N. Chandrasekaran का Tata Sons के चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल फरवरी 2027 तक है। हालांकि, उनका चेयरमैन पद पर बने रहना Tata Sons के बोर्ड में उनके डायरेक्टर के रूप में दोबारा नियुक्त होने पर निर्भर करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata Chandrasekaran के आगे जारी रहने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में AGM में ट्रस्ट्स के वोट को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
18 अगस्त को होगी अहम AGM
Tata Sons की AGM 18 अगस्त को प्रस्तावित है। इस बैठक में Chandrasekaran की बोर्ड में पुनर्नियुक्ति महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होगी। अगर AGM में उन्हें डायरेक्टर के रूप में दोबारा नियुक्त नहीं किया जाता है, तो उनका चेयरमैन पद भी अचानक समाप्त हो सकता है।
ऐसी स्थिति में Tata Group के शीर्ष स्तर पर बिना पूर्व निर्धारित योजना के नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है।
Sir Ratan Tata Trust को लेकर भी पेच
AGM से पहले Sir Ratan Tata Trust (SRTT) से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। Maharashtra Charity Commissioner ने SRTT को फिलहाल निर्णय लेने की प्रक्रिया से निलंबित किया हुआ है। यह कार्रवाई Maharashtra Charitable Trusts Act के कथित उल्लंघनों से जुड़ी जांच के बाद हुई है।
Tata Sons के Articles of Association के अनुसार, Sir Ratan Tata Trust और Sir Dorabji Tata Trust द्वारा संयुक्त रूप से नामित ट्रस्टी AGM में वोट कर सकते हैं। लेकिन SRTT के निलंबन के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि वह Charity Commissioner की अनुमति के बिना ट्रस्टी नामित कर सकता है या नहीं।
Noel Tata समेत इन ट्रस्टियों ने मांगी AGM में शामिल होने की अनुमति
रिपोर्ट के मुताबिक, SRTT के कई ट्रस्टियों ने AGM में शामिल होने की अनुमति मांगी है। इनमें Noel Tata, Darius Khambata और Jehangir Jehangir शामिल हैं।
इन ट्रस्टियों का कहना है कि AGM में उनकी मौजूदगी ट्रस्ट के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।
करीब एक साल पहले सर्वसम्मति से मिला था समर्थन
Chandrasekaran के पद छोड़ने की मौजूदा संभावना पिछले साल की स्थिति से अलग है। करीब एक साल पहले Tata Trusts के ट्रस्टियों ने सर्वसम्मति से Chandrasekaran के लिए पांच साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी।
हालांकि, फरवरी 2026 में Tata Sons बोर्ड ने उनके पुनर्नियुक्ति के मामले को टाल दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, Noel Tata ने नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी और दो साल के कार्यकारी कार्यकाल का सुझाव दिया था।
Ratan Tata के निधन के बाद बढ़ा मतभेद
Tata Group के भीतर मौजूदा अनिश्चितता को Ratan Tata के 2024 के अंत में निधन के बाद से बढ़े आंतरिक मतभेदों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रस्टियों के बीच मतभेद और कई सदस्यों के जाने से समूह के शीर्ष स्तर पर परिस्थितियां जटिल हुई हैं।
अगर Chandrasekaran हटते हैं तो क्या होगा?
अगर N. Chandrasekaran AGM से पहले पद छोड़ने का फैसला करते हैं या AGM में उन्हें डायरेक्टर के रूप में दोबारा नियुक्ति नहीं मिलती है, तो Tata Group में अचानक नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बन सकती है।
हालांकि, Tata Sons की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल Chandrasekaran के पद छोड़ने की खबर को संभावित घटनाक्रम के रूप में ही देखा जा रहा है।
