FCRA Bill पर विनय मोहन क्वात्रा ने साफ की तस्वीर

नई दिल्ली: अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रस्तावित Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी FCRA बिल को लेकर उठ रही चिंताओं और आलोचनाओं पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसी चर्च, चैरिटी या किसी खास समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता, बेहतर प्रशासन, स्पष्ट नियम और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

FCRA बिल को लेकर क्या बोले क्वात्रा?

विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया के जरिए FCRA बिल से जुड़ी उन बातों को स्पष्ट करने की कोशिश की, जिन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का FCRA ढांचा किसी धर्म, समुदाय या विचारधारा के आधार पर अलग-अलग तरीके से लागू नहीं होता।

उनके मुताबिक, प्रस्तावित 2026 का बिल और नियम मौजूदा व्यवस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम हैं। इसका उद्देश्य विदेशी योगदान से जुड़ी व्यवस्था में ज्यादा पारदर्शिता और स्पष्टता लाना है।

दूसरे देशों के कानूनों का भी दिया उदाहरण

क्वात्रा ने कहा कि विदेशी फंडिंग और उससे जुड़े नियमन को लेकर भारत अकेला देश नहीं है। उन्होंने अमेरिका के Foreign Agents Registration Act (FARA) और Foreign Account Tax Compliance Act (FATCA) का उदाहरण दिया। इसके अलावा उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में मौजूद संबंधित कानूनों का भी उल्लेख किया।

FCRA का इतिहास क्या है?

विनय मोहन क्वात्रा ने बताया कि भारत में FCRA व्यवस्था की शुरुआत 1976 में हुई थी। इसके बाद इसे 2010 में आधुनिक रूप दिया गया और 2016, 2018 और 2020 में इसमें बदलाव किए गए।

उनके अनुसार, 2026 का प्रस्तावित बिल इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए विदेशी योगदान की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की कोशिश है।

रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर संपत्ति को लेकर क्या प्रावधान?

क्वात्रा ने रजिस्ट्रेशन रद्द या सरेंडर होने की स्थिति से जुड़े प्रावधानों पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियां 2010 से लागू प्रावधान के तहत पहले से ही राज्य सरकार की प्राधिकरण व्यवस्था में निहित होती हैं।

प्रस्तावित बिल में ऐसी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने की बात है। अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन दोबारा बहाल होता है, तो उसके अनुसार संपत्ति और अप्रयुक्त धनराशि पूरी तरह वापस की जाएगी।

धार्मिक स्थलों को लेकर भी दी सफाई

धार्मिक स्थलों से जुड़े प्रावधानों पर भी क्वात्रा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल का धार्मिक स्वरूप सुरक्षित रहेगा।

अगर रजिस्ट्रेशन रद्द हुई किसी संस्था ने किसी धार्मिक स्थल से जुड़ी संपत्ति बनाई है, तो उसे उसी धर्म की किसी अन्य FCRA-पंजीकृत संस्था को सौंपने का प्रावधान होगा, ताकि वहां धार्मिक गतिविधियों की निरंतरता बनी रहे।

NGO और किसी समुदाय को निशाना बनाने के आरोप पर जवाब

क्वात्रा ने उन आशंकाओं को खारिज किया कि FCRA बिल से नागरिक समाज संगठनों की विदेशी सहायता बंद हो जाएगी या किसी खास समुदाय को निशाना बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भारत में 30 लाख से अधिक NGOs हैं, जबकि इनमें से 14,450 संस्थाओं के पास FCRA रजिस्ट्रेशन है। यानी बड़ी संख्या में NGO इस कानून के दायरे में ही नहीं आते।

विपक्ष ने जताई आपत्ति

वहीं, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा है कि यदि यह बिल संसद में पेश किया जाता है तो विपक्षी दल इसका जोरदार विरोध करेंगे। उन्होंने प्रस्तावित कानून को “असंवैधानिक और जनविरोधी” बताया और आरोप लगाया कि इसका निशाना अल्पसंख्यक और NGO हो सकते हैं।

JPC को भेजने की भी मांग

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा और कई ईसाई संगठनों ने केंद्र से इस बिल को संसद में आगे बढ़ाने से पहले संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग की है।

Catholic Bishops’ Conference of India और National Council of Churches in India सहित कुछ ईसाई संगठनों ने भी रजिस्ट्रेशन खत्म होने, संपत्ति के निहित होने और प्रस्तावित नियामक प्राधिकरण से जुड़े प्रावधानों पर चिंता जताई है। इन संगठनों ने व्यापक हितधारक परामर्श की मांग की है।

FCRA Amendment Bill, 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। जहां विनय मोहन क्वात्रा इसे पारदर्शिता, बेहतर प्रशासन, स्पष्ट नियम और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रहे हैं, वहीं के.सी. वेणुगोपाल, लालदुहोमा और कुछ संगठनों ने इसके प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ऐसे में बिल की आगे की संसदीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

 

 

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