मोमोज की लाल चटनी से रहें सावधान! कानपुर में 115 किलो चटनी नष्ट, जानें सेहत के लिए क्यों बनी खतरा

नई दिल्ली: मोमोज के साथ मिलने वाली तीखी लाल चटनी बहुत से लोगों को पसंद होती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई के दौरान करीब 115 किलो मोमोज की लाल चटनी नष्ट की गई। जांच में इसे खाने योग्य नहीं पाया गया। इसके बाद मोमोज के साथ परोसी जाने वाली लाल चटनी की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर सवाल उठे हैं।

कानपुर में 115 किलो चटनी क्यों नष्ट की गई?

फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई के दौरान कानपुर में मोमोज के साथ परोसी जाने वाली लाल चटनी की जांच की गई। जांच में करीब 115 किलो चटनी खाने योग्य नहीं पाई गई, जिसके बाद उसे नष्ट कर दिया गया। यह मामला इस बात की ओर ध्यान खींचता है कि स्ट्रीट फूड के साथ मिलने वाली चटनी की गुणवत्ता और स्वच्छता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

1. आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल

मोमोज की लाल चटनी का चमकदार रंग देखकर अक्सर लगता है कि इसमें लाल मिर्च और टमाटर का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन कुछ जगहों पर चटनी को ज्यादा चमकीला रंग देने के लिए सिंथेटिक फूड कलर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ आर्टिफिशियल कलर्स से एलर्जी, त्वचा संबंधी रिएक्शन और बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

2. MSG से बढ़ाया जाता है स्वाद

कुछ कमर्शियल मोमो चटनियों में मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी MSG का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ लोगों को अधिक मात्रा में MSG लेने से सिरदर्द, मतली, बेचैनी या दिल की धड़कन तेज होने जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं।

3. ज्यादा प्रिजर्वेटिव भी हो सकते हैं

चटनी को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए कुछ कमर्शियल उत्पादों में सोडियम बेंजोएट और पोटैशियम सोर्बेट जैसे प्रिजर्वेटिव इस्तेमाल किए जाते हैं।

सीमित मात्रा में इनका इस्तेमाल अलग बात है, लेकिन जरूरत से ज्यादा या बार-बार सेवन कुछ लोगों में एलर्जी और पाचन संबंधी परेशानी पैदा कर सकता है।

4. बहुत ज्यादा लाल मिर्च से परेशानी

लाल चटनी में कैप्साइसिन की मात्रा अधिक हो सकती है। जरूरत से ज्यादा तीखी चटनी खाने पर पेट में जलन, एसिडिटी, गैस, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्या हो सकती है।

जिन लोगों को पहले से अल्सर या IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) जैसी समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

5. बासी या खराब सामग्री का खतरा

अगर चटनी बनाने में पुराने टमाटर, लहसुन, मिर्च या अन्य खराब सामग्री का इस्तेमाल किया जाए, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। इससे फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त का खतरा बढ़ सकता है।

6. ज्यादा नमक और खराब क्वालिटी का तेल

कुछ जगहों पर चटनी का स्वाद बढ़ाने और लागत कम रखने के लिए ज्यादा नमक तथा कम गुणवत्ता वाले रिफाइंड या हाइड्रोजेनेटेड तेल का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।

ऐसी चीजों का बार-बार सेवन हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्याओं और सूजन से जुड़ी परेशानी बढ़ा सकता है।

7. गाढ़ापन बनाए रखने वाले स्टेबलाइजर्स

कुछ पैकेज्ड या कमर्शियल चटनियों में जैंथन गम, कैरेजीनन और अन्य स्टेबलाइजर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनका उद्देश्य चटनी की बनावट और स्थिरता बनाए रखना होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, संवेदनशील लोगों में इनसे पेट फूलने या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है।

8. खराब हाइजीन भी बड़ा कारण

स्ट्रीट फूड स्टॉल पर कई बार चटनी बड़ी मात्रा में बनाकर घंटों खुली रखी जाती है। गर्मी, धूल, मक्खियों और बार-बार इस्तेमाल होने वाले बर्तनों के कारण इसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसी स्थिति में चटनी के सेवन से फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

रिपोर्ट के मुताबिक, इन लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए:

  1. जिनको एसिडिटी या गैस की समस्या रहती है
  2. पेट के अल्सर से पीड़ित लोग
  3. IBS से पीड़ित लोग
  4. बवासीर की समस्या वाले लोग
  5. छोटे बच्चे
  6. बुजुर्ग
  7. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग

मोमोज की चटनी को लेकर क्या समझें?

कानपुर में हुई कार्रवाई के बाद यह मामला सामने आया है कि मोमोज के साथ मिलने वाली लाल चटनी की सामग्री, साफ-सफाई और रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है। हर लाल चटनी में मिलावट या हानिकारक सामग्री होना जरूरी नहीं है, लेकिन खराब गुणवत्ता, अत्यधिक तीखापन, गलत तरीके से रखी गई चटनी या संदिग्ध सामग्री स्वास्थ्य के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।

इसलिए मोमोज खाते समय चटनी की स्वच्छता और गुणवत्ता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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