जिला गन्ना अधिकारी ने ग्राम अफजलपुर पट्टी में सर्वे-सट्टा प्रदर्शन का किया निरीक्षण
मानसूनी गन्ना बुवाई में 'सिंगल बड' तकनीक अपनाने एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने की किसानों से अपील
रामपुर, पेराई सत्र 2026-27 के अंतर्गत गन्ना विभाग एवं चीनी मिल के संयुक्त तत्वावधान में संचालित 63 कॉलम गन्ना सर्वे डाटा के ग्राम स्तरीय सर्वे-सट्टा प्रदर्शन अभियान के तहत जिला गन्ना अधिकारी वेद प्रकाश सिंह ने चीनी मिल स्योहारा के जोनल अधिकारी नीमेंद्र कुमार व विभागीय टीम के साथ विकास खंड मिलक क्षेत्र के ग्राम अफजलपुर पट्टी का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान वेद प्रकाश सिंह ने कृषकों से अपने-अपने सर्वे-सट्टा खातों का सावधानीपूर्वक परीक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की त्रुटि अथवा आपत्ति हो तो उसे मौके पर उपलब्ध आपत्ति रजिस्टर में दर्ज कर समय से निस्तारित कराया जाए। साथ ही नए सदस्यों का पंजीकरण, वारिसान दर्ज कराने तथा उपज बढ़ोत्तरी से संबंधित प्रत्यावेदन 30 सितंबर, 2026 तक अनिवार्य रूप से जमा करने के लिए किसानों को जागरूक किया गया।
उन्होंने आगामी मानसूनी गन्ना बुवाई में ‘सिंगल बड’ (एक आँख) तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए बताया कि इस तकनीक से 60 से 70 प्रतिशत तक बीज की बचत होती है, पौधों का बेहतर जमाव होता है तथा अधिक संख्या में स्वस्थ एवं मजबूत कल्ले विकसित होते हैं। पर्याप्त धूप एवं हवा मिलने से गन्ने की गुणवत्ता और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
जिला गन्ना अधिकारी ने किसानों को मृदा परीक्षण कराने, ट्रेंच विधि से बुवाई करने, नियंत्रित सिंचाई अपनाने तथा ड्रिप सिंचाई एवं फर्टिगेशन तकनीक का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि ड्रिप सिंचाई से कम पानी में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है तथा श्रम लागत में कमी के साथ पैदावार में वृद्धि होती है। उन्होंने उर्द एवं मूंग जैसी सहफसली खेती अपनाने तथा गन्ने की सूखी पत्तियों को जलाने के बजाय मल्चर के माध्यम से मिट्टी में मिलाने की भी सलाह दी, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति एवं जलधारण क्षमता बढ़ती है।
उन्होंने पेड़ी (रैटून) प्रबंधन में आरएमडी (रैटून मैनेजमेंट डिवाइस) के उपयोग, ड्रोन आधारित फसल सुरक्षा, एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने पर भी बल दिया।
निरीक्षण के दौरान वेद प्रकाश सिंह ने गन्ने की को-238 प्रजाति का सत्यापन किया। फसल में पोका बोइंग रोग का हल्का प्रभाव पाए जाने पर संबंधित कृषक को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के छिड़काव की सलाह दी। इसके अतिरिक्त पॉपुलर वृक्षों के बीच खड़ी गन्ने की फसल का निरीक्षण करते हुए उन्होंने बताया कि अत्यधिक छाया के कारण फसल का विकास प्रभावित हो रहा है। किसानों को अन्य उपयुक्त फसलों के साथ गन्ने की सहफसली खेती अपनाने का सुझाव भी दिया गया।
उन्होंने किसानों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, अटल पेंशन योजना तथा प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना की जानकारी देते हुए अधिक से अधिक संख्या में इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी, क्षेत्रीय गन्ना पर्यवेक्षक तथा ग्राम बेरखेड़ा एवं आसपास के क्षेत्रों के अनेक प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।
