8 महीने बाद भी नहीं दाखिल हुआ आरोपपत्र: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर केस में कोर्ट ने चौक पुलिस को लगाई फटकार, मांगी प्रगति रिपोर्ट
- वाराणसी मंडल ब्यूरो पंकज झा
वाराणसी। चौक थाने में दर्ज एक मामले में आजाद सेना के अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की अब तक की कार्यवाही पर प्रगति रिपोर्ट तलब करने की अर्जी पर पुलिस की ओर से आख्या न आने पर विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए चौक पुलिस को जल्द से जल्द आख्या कोर्ट में भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही मामले की सुनवाई के लिए अगली तिथि 1 अगस्त नियत कर दी गई है।
अमिताभ ठाकुर ने अपने अधिवक्ता अनुज यादव के माध्यम से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें कहा गया कि बीते दिसंबर माह में उनके खिलाफ चौक थाने में दर्ज मामले में 6 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आरोपपत्र नहीं भेजा गया है। अर्जी में आरोप लगाया गया कि एफआईआर दर्ज होने के 10 दिनों के भीतर ही आवेदक की न्यायिक हिरासत मांगी गई थी, लेकिन उसके बाद जांच को कानूनी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया गया और न ही कोई उचित पुलिस रिपोर्ट सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई।
उन्होंने अर्जी में सवाल उठाया कि “क्या कोई जांच एजेंसी 10 दिन में न्यायिक हिरासत मांगने के बाद बिना किसी ठोस कारण के 6 महीने से अधिक समय तक जांच लंबित रख सकती है?” पूर्व आईपीएस ने कहा कि मामले के दर्ज होने और गिरफ्तारी के 8 महीने बाद भी पुलिस न तो जांच पूरी कर पाई है और न ही कोर्ट में आरोपपत्र प्रेषित किया है। इस पर कोर्ट ने चौक पुलिस से आख्या तलब करते हुए सुनवाई की अगली तिथि 24 जुलाई तय की थी।
मामला क्या है:
बड़ी पियरी निवासी हिन्दू युवा वाहिनी के नेता एवं वीडीए के मानद सदस्य अम्बरीष सिंह भोला ने 9 दिसंबर को चौक थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर उनके खिलाफ आपराधिक मामलों में संलिप्तता और बहुचर्चित कफ सिरप मामले में बिना साक्ष्य के आरोप लगाए, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर आघात पहुंचा। इस मामले में पुलिस ने आजाद सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर और एक अन्य के खिलाफ चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया था।
