जौहर विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने के बजाय सरकार स्वयं संचालित करे – फसाहत अली खान उर्फ़ शानू

रिपोर्ट: शाहबाज़ खां रामपुर

मुरादाबाद में फसाहत अली खान उर्फ़ शानू के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने मंडलायुक्त आनंजय कुमार सिंह से मुलाकात कर जौहर विश्वविद्यालय को ध्वस्त न किए जाने तथा उसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अधिग्रहित (टेकओवर) कर संचालित किए जाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने मंडलायुक्त को दिए गए ज्ञापन में कहा कि जौहर विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है। यदि विश्वविद्यालय में किसी प्रकार की अनियमितताएं पाई गई हैं तो उनके लिए दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन विश्वविद्यालय की बहुमूल्य इमारतों एवं शैक्षणिक ढांचे को नष्ट करना जनहित में उचित नहीं होगा।

Instead of demolishing Jauhar University, the government should run it itself – Fasahat Ali Khan alias Shanu.

प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद मंडलायुक्त आनंजय कुमार सिंह ने आश्वासन दिया कि वह उनकी मांगों एवं ज्ञापन को शासन के समक्ष रखेंगे।

इस अवसर पर फसाहत अली खान उर्फ़ शानू ने कहा कि उन्हें मंडलायुक्त से न्याय की पूरी उम्मीद है, क्योंकि वह निष्पक्ष एवं न्यायप्रिय अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी है कि विश्वविद्यालय में कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं, लेकिन यह भी सत्य है कि विश्वविद्यालय में लगा वैध अथवा अवैध समस्त धन अंततः सरकारी संसाधनों और जनता के पैसे से जुड़ा हुआ है। इसलिए जनता के धन से निर्मित इस बहुमूल्य शैक्षणिक परिसर को ध्वस्त करने के बजाय उत्तर प्रदेश सरकार को इसका अधिग्रहण कर स्वयं संचालन करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रहे और सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण हो सके।

Instead of demolishing Jauhar University, the government should run it itself – Fasahat Ali Khan alias Shanu.

“जिस प्रकार पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और सर सैयद अहमद ख़ान द्वारा स्थापित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय आज राष्ट्रीय महत्व के संस्थान हैं और सार्वजनिक व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होते हैं, उसी प्रकार यदि जौहर विश्वविद्यालय के हित, छात्रों के भविष्य और शिक्षा की निरंतरता को देखते हुए आवश्यक समझा जाए, तो इसे भी सरकार के संरक्षण एवं संचालन में सौंपने पर विचार किया जा सकता है। इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियाँ निर्बाध रूप से चल सकेंगी और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।”

उन्होंने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय को बचाना केवल एक संस्थान को बचाने का विषय नहीं है, बल्कि शिक्षा, विद्यार्थियों के भविष्य और सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण का भी प्रश्न है। सरकार को जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल के साथ बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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