बच्चे और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम- निरंकारी बाल समागम

एटा-संत निरंकारी मिशन द्वारा जॉन स्तरीय बाल समागम का आयोजन इटावा के बाला जी मंडपम गैस्ट हॉउस में हुआ। यहां पर सैकड़ो बच्चों ने आध्यात्मिक चेतना द्वारा दया, करुणा,सब्र शांति, सहनशीलता जैसे दैवीय गुणों को गीत, कविता, एवं लघु नाटकीय माध्यम से प्रस्तुत किया। जिसमे एटा से भी निरंकारी बच्चों ने सहभागिता ली।

बच्चों के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का होना अति आवश्यक

निरंकारी बाल समागम में मेरठ से पधारे निरंकारी संत आशीष ने बताया कि बच्चों के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का होना अति आवश्यक है। जिसके द्वारा वह एक अच्छे नागरिक और एक अच्छे गुरसिख बन सकें।

आज संत निरंकारी मिशन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं राज पिता रमित जी के पावन सानिध्य में बच्चों को आध्यात्मिक जागरूकता की ओर ले जाने का सफल प्रयास कर रहा है और उन्हें मानसिक रूप से भी सशक्त बना रहा है।

मुश्किलो को आध्यात्मिक चेतन द्वारा हल कर सके

संत निरंकारी मिशन के अंतर्गत बच्चों को शुरू से ही बाल संगतो के माध्यम से उनके अंदर व्याप्त गुणों को उजागर किया जाता है। जिससे वह होनहार बालक बन सके। और बड़े होकर युवावस्था में आने वाली हर एक मुश्किल को आध्यात्मिक चेतन द्वारा हल कर सके।

मनचासीन संत ने बताया- बच्चों के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण स्थान है। जिस प्रकार से एक नन्हे से पौधे के चारों ओर सुरक्षा का घेरा बनाकर उसे सुरक्षित रखा जाता है। जिससे उस पौधे को कोई जानवर नुकसान न पहुंचा सके, समय बीतने के साथ वह पौधा जब पेड़ का रूप धारण कर लेता है तो इस पेड़ से बड़े-बड़े जानवरों को भी बांधा जा सकता है।

आज के बच्चे कल का भविष्य है

ठीक इसी प्रकार अगर बच्चों को बालपन से ही आध्यात्मिक चेतना की देखरेख में रखा जाए तो वह बच्चा आगे चलकर एक गुरसिख के रूप में निखरकर सामने आता है और उसके जीवन पर दुनियावी माया, मानसिक कुरीतियों, बुराइयों का कोई असर नही पड़ता। आज के बच्चे कल का भविष्य है* इस बात को हमें ध्यान में रखना होगा।

बाल समागम के दौरान आगरा जोन के जोनल इंचार्ज श्री एच. के. अरोड़ा जी ने आये हुए सभी श्रद्धांलुओं का आभार व्यक्त किया।

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