जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर पूर्व IPS बृजलाल का हमला, बोले- ‘आज़म खान अपने कर्मों का फल भुगत रहे हैं’
पूर्व डीजीपी ने आज़म खान पर लगाए गंभीर आरोप, सरकार की कार्रवाई को बताया कानून के अनुरूप
- रिपोर्ट: शाहबाज़ खां
ब्रीज लाल पूर्व रिटायर आईपीएस अफसर कहते है की समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री आज़म ख़ान जेल में अपने कर्मों का फल भुगत रहे हैं। समय- समय की बात है, आज़म ख़ान ख़ुद को सर्वशक्तिमान समझते थे, उनका ख़ुद का “आज़म प्रोसीजर कोड और आज़म पिनल कोड” चलता था। खुलेआम गोकशी होती थी और गौ माता का मांस खुलेआम रामपुर में बेचा जाता था। आज़म ख़ान खुलेआम कहते थे की मुरादाबाद के मुसलमान काला गोश्त (भैंसा) खाते हैं किंतु रामपुर के मुसलमान तो सफेद गोश्त गोमांस ही खाते है । पूरे उत्तरप्रदेश में एक क़ानून, किंतु रामपुर में आज़म ख़ान का क़ानून।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर प्राइवेट यूनिवर्सिटी में आज़म ख़ान ने सभी हदें पर कर दी।ख़ुद आजीवन चांसलर, पत्नी डॉ तज़ीन फातिमा प्रो वाइस चांसलर, परिवार का बोलबाला । सरकारी, किसानों, दलितों और मुसलमानों की ज़मीनो पर कब्जा करके यूनिवर्सिटी में मिला लिया। मेरे एक रामपुर निवासी बैचमेट भी आज़म ख़ान से पीड़ित रहे। अपनी सरकार में आज़म ख़ान 50 वर्षों से आबाद बाल्मीकि बस्ती को ध्वस्त करके यूनिवर्सिटी में मिलाना चाहता थे किंतु बीजेपी के विरोध के कारण ऐसा नहीं कर पाये। मैं भी उस विरोध में शामिल था।
प्रदेश सरकार द्वारा निर्मित सरकारी डाक बंगला भी यूनिवर्सिटी कैंपस में लेकर कब्जा कर लिया। वहाँ कोई सरकारी अधिकारी डर के मारे जाते ही नहीं थे। आज़म कैबिनेट मंत्री के साथ जल निगम के अध्यक्ष भी थे। क्लास 3 की पूरी भर्तियाँ “उत्तरप्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग” करती थी किंतु आज़म ख़ान ने जल निगम की भर्तियाँ भ्रष्टाचार करके स्वम् की, एक धर्म विशेष के लोगों को भर लिया। सरकार बदलने के बाद जब जाँच हुई तो बोल दिया कि उससे कोई मतलब नहीं, अधिकारियों ने भर्तियाँ की उसने फाइल पर केवल दस्तखत किए।
पीडब्ल्यूडी द्वारा 13.50 करोड़ की लागत से 4 लेन पहुँच मार्ग बनाया गया जिसको आज़म ने यूनिवर्सिटी में मिला लिया। सरकारी खर्च से यूनिवर्सिटी के लिए एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनवाया, उसका सालाना एक करोड़ से अधिक का टैक्स यूनिवर्सिटी को देना था परंतु आज़म ख़ान की दादागिरी के कारण पूरा खर्च सरकार उठाती रही।उत्तरप्रदेश के राज्यपाल टी वी राजेश्वर ने मौलाना जौहर यूनिवर्सिटी संशोधन अधिनियम पारित नहीं होने दिया क्योकि इसी में आज़म ख़ान द्वारा इस विश्वविद्यालय पर पारिवारिक कब्जे को क़ानूनी रूप देना था।
इसी बीच 23 जून 2014 जुलाई से 22 जुलाई 2014 तक अज़ीज़ क़ुरैशी उत्तरप्रदेश के कार्यकारी राज्यपाल बने और एक महीने में पूरा खेल हो गया। केंद्र में कांग्रेस की यूपीए सरकार और प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार, दोनों तुष्टिकरण के लिए खुख्यात। मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी (संशोधन) बिल पर कार्यकारी राज्यपाल अज़ीज़ क़ुरैशी ने दस्तख़त कर दिए और आज़म ख़ान को सर्वशक्तिमान बना दिया।
कर्म का फल इसी जीवन में मिलता है जो आज़म ख़ान को मिल रहा है। कई आपराधिक मामलों में ख़ुद जेल में बंद है, पुत्र को भी सजा हो चुकी है।
अब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है। विश्वविद्यालय की 40 भवनों में 38 भवनों के नक्शे ही पास नहीं कराये गए,क्योकि अधिकतर कब्जाई ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे। अब योगी सरकार, सरकार किसानों, दलितों, मुसलमानों की कब्जाई ज़मीन मुक्त करा रही है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने इस यूनिवर्सिटी प्रशासन को नोटिस दिया है कि 15 दिन में ख़ुद के खर्चे से अवैध निर्माण ध्वस्त करने कब्जा की गई ज़मीन ख़ाली करें अन्यथा बुलडोज़र चलेगा। हाँ, छात्रों को दूसरे महाविद्यालयी में समायोजित किया जायेगा जिससे उनका कोई नुक़सान न हो।
“आदमी नहीं, समय बलवान होता है”- इसे कभी नहीं भूलना चाहिये।ग़लत कार्यों के परिणाम इसी जन्म में भुगतना पड़ता है। ख़ामियाज़ा तो भुगतना होगा।
