- रिपोर्ट: मनोज यादव
एटा: सड़क पर चलने वाला हर वाहन तभी सुरक्षित माना जाता है, जब उसके पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र और प्रदूषण नियंत्रण (PUCC) प्रमाणपत्र हो। परिवहन विभाग आम नागरिकों और निजी वाहन मालिकों पर तो समय-समय पर सख्त अभियान चलाकर भारी जुर्माना लगाता है, लेकिन जब बात सरकारी वाहनों की आती है तो नियमों का पालन कहीं पीछे छूट जाता है।
एटा नगर पालिका के कई वाहन वर्षों से बिना वैध फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नगर पालिका का टाटा टैंकर UP82BT1054 का प्रदूषण प्रमाणपत्र वर्ष 2025 से समाप्त है। वहीं कूड़ा वाहन UP82AT1778 और UP82AT1775 का प्रदूषण प्रमाणपत्र वर्ष 2022 से तथा फिटनेस प्रमाणपत्र वर्ष 2023 से समाप्त बताया जा रहा है, UP82T1792 कूड़ा भरने का वाहन(JCB) की फिटनेस 2016 से समाप्त है इनके अलावा और भी कई वाहन हैं जो मानकों को ताक पर रख कर शहर की सड़कों पर संचालित हो रहे हैं।

यह स्थिति केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है। बिना फिटनेस वाले वाहनों में ब्रेक, स्टीयरिंग और अन्य तकनीकी खराबियों की आशंका अधिक रहती है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। साथ ही, बिना वैध PUCC वाले वाहन पर्यावरण में जहरीला धुआं छोड़कर लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिवहन विभाग निजी वाहनों पर कार्रवाई करने में तत्पर रहता है, तो सरकारी वाहनों पर वही सख्ती क्यों नहीं दिखाई देती? क्या कानून केवल आम नागरिकों के लिए है? जिला प्रशासन और परिवहन विभाग को तत्काल ऐसे सभी वाहनों का संचालन रोककर उनकी फिटनेस और प्रदूषण जांच करानी चाहिए। कानून का सम्मान तभी होगा, जब सरकारी विभाग भी उसी कसौटी पर खरे उतरेंगे जिस पर आम जनता को परखा जाता है।
