मेरठ कांड में पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप, अखिल भारतीय जाटव महासभा ने रामपुर सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन

  • रिपोर्ट: शाहबाज़ खां

रामपुर मे अखिल भारतीय जाटव महासभा के प्रदेश अध्यक्ष महेश कुमार सागर के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों ने मेरठ में अनुसूचित जाति की छात्रा ललिता गौतम के अपहरण एवं हत्या प्रकरण के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट रामपुर को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में कहा गया है कि 8 जुलाई 2026 को छात्रा ललिता गौतम के परिजन, महिलाएं, बच्चे तथा अनुसूचित जाति समाज के लोग मेरठ जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पहुंचे थे। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें जिलाधिकारी से मिलने नहीं दिया और कलक्ट्रेट गेट पर ही रोक दिया। इसके बाद वहां मौजूद लोगों के साथ कथित रूप से बल प्रयोग किया गया तथा विरोध कर रहे लोगों के साथ मारपीट की गई।

महासभा ने अपने ज्ञापन में मेरठ में तैनात कुछ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने सरकारी पद का दुरुपयोग किया, प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर समाज की भावनाओं को आहत किया। संगठन का कहना है कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

संगठन ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारियों की समिति से कराई जाए। साथ ही प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने के दावों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

प्रदेश अध्यक्ष महेश कुमार सागर ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता और न्याय का अधिकार देता है। यदि किसी भी अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जातिगत भेदभाव या कानून के विपरीत कार्रवाई की गई है, तो उसके विरुद्ध तत्काल विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है और दोषी अधिकारियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

ज्ञापन में मुख्यमंत्री से दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने, निष्पक्ष जांच कराने तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की गई है। इस संबंध में ज्ञापन की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय गृह मंत्री सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है।

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