ऐलनाबाद, 10 जुलाई (एम पी भार्गव): भारत वर्ष में हरियाणा एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां केंद्र तथा राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं आमजन के लिए संजीवनी बनी हुई है, वहीं एक ऐसी योजना सरकार के गले की फांस बनती नजर आ रही है, जिसकी जानकारी दिल्ली दरबार में पहुंचने के बाद भी जांच फाईल आगे न बढ़ती देख निष्पक्ष जांच के लिए माननीय पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में दस्तक देती नजर आने लगी है।
मिली जानकारी अनुसार हिसार जिले के कई गांवों में बिना मौके का मुआयना किए कुम्हार जाति के ऐसे लोगों को पट्टे बांटे दिए गए,जो इसके पात्र भी नहीं थे, जबकि पात्र वंचित रह गए। सरकार ने माटी कला को प्रोत्साहित करने के खनन अधिकार पत्र कुम्हार जाति के लोगो में वितरित कर दिए, ताकि वह माटी कला को बढ़ावा दे सकें। आलम यह है कि उन जमीनों पर पक्के मकान ही नहीं, सरकारी इमारतें खड़ी है, वहीं दूसरी ओर माटी कला से संबंधित लोग माटी खरीद कर काम चला रहे हैं।
पंचायत विभाग ने बिना किसी जांच के खनन अधिकार पत्र जारी कर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है। कई गांवों में आबंटन की सूची तो आई, मगर अधिकार पत्र नहीं पहुंचे। गांव बहबलपुर में मिट्टी खनन के लिए आरक्षित जमीन पर सरकारी स्टेडियम बना हुआ है, जहां कुम्हार जाति के ज्यादातर लोग रहते हैं। मिट्टी खनन के अधिकार पत्र के अनुसार किला नंबर 15 रिजर्व है, जहां सरकारी स्टेडियम बना हुआ है। कैमरी गांव में करीब अढ़ाई दर्जन परिवार माटी कला के काम से जुड़े हुए हैं, जहां छः कनाल ज़मीन खनन के लिए रिजर्व थी, वहां प्रभावी लोगों ने कब्जा किया हुआ है। इस गांव में सिर्फ खनन आबंटन की सूची आई है, अधिकार पत्र नहीं।
इसी प्रकार गांव डाबड़ा के परिवारों को नहीं मिले अधिकार पत्र, जबकि इस गांव में करीब एक दर्जन परिवार माटी कला से जुड़े होने के साथ अपना काम कर रहे हैं। इस गांव में खनन के लिए एक एकड़ भूमि आरक्षित हैं, जिसपर पंचायत ने कब्जा किया हुआ है। गंगवा गांव में सरकारी स्कूल के पीछे करीब एक एकड़ जमीन तथा आज़ाद नगर व गंगवा के बीच दो एकड़ जमीन कुम्हार जाति के लोगो के खनन के लिए रिजर्व थी, जिसपर लोगों ने मकान बना लिया है और कम्युनिटी सेंटर की इमारत खड़ी हो गई है। ऐसे कई गांवों में अधिकार पत्र है जमीन नहीं है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि सरकारी सूची में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनका माटी कला से कोई संबंध नहीं है और ज्यादातर सरकारी सेवा कर रहे हैं। सरकार ने माटी कला बोर्ड का अभी तक कोई चेयरमैन नियुक्त नहीं किया है, जबकि इसके लिए एक मंत्री के संतरी के प्रयास जारी बताये जा रहे हैं?
