क्या सूरज के अंत के बाद भी बची रहेगी धरती? नई रिसर्च ने बढ़ाई उम्मीद, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
नई दिल्ली। अरबों वर्षों बाद जब सूरज अपने जीवन के अंतिम चरण में पहुंचेगा, तब धरती का क्या होगा? यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय रहा है। अब एक नई स्टडी ने इस विषय पर नई उम्मीद जगाई है। शोध के मुताबिक, पहले की तुलना में धरती के सूरज में समा जाने की संभावना कम हो सकती है, हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
5 अरब साल बाद बदलेगा सूरज का स्वरूप
वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग 5 अरब वर्ष बाद सूरज का हाइड्रोजन ईंधन समाप्त होने लगेगा। इसके बाद वह तेजी से फैलकर ‘रेड जायंट’ (Red Giant) में बदल जाएगा। पहले माना जाता था कि इस दौरान सूरज बुध, शुक्र और संभवतः पृथ्वी को भी अपने भीतर समाहित कर लेगा।
नई रिसर्च में क्या सामने आया?
हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने सूरज और ग्रहों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का नया मॉडल विकसित किया। अध्ययन के अनुसार, सूरज के बूढ़ा होने पर उसका गुरुत्वाकर्षण पहले के अनुमान से कमजोर हो सकता है। ऐसी स्थिति में पृथ्वी अपनी मौजूदा कक्षा से धीरे-धीरे बाहर की ओर खिसक सकती है, जिससे उसके सूरज में समाने का खतरा कम हो सकता है।
धरती का बचना अभी भी तय नहीं
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन पृथ्वी के सुरक्षित रहने की गारंटी नहीं देता। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपने अंतिम चरण में सूरज कितना द्रव्यमान (Mass) खोएगा। यदि सूरज अपने द्रव्यमान का बड़ा हिस्सा खो देता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण कमजोर होगा और पृथ्वी दूर चली सकती है। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो सूरज का बढ़ता आकार और अत्यधिक गर्मी पृथ्वी के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं।
सूरज के अंतिम चरण में क्या होगा?
जब सूरज का हाइड्रोजन समाप्त होगा, तब वह तेजी से फैलने लगेगा और अंतरिक्ष में बड़ी मात्रा में गैस एवं अन्य पदार्थ छोड़ेगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वह अपने कुल द्रव्यमान का लगभग आधा हिस्सा खो सकता है। इससे उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति कमजोर होगी और जो ग्रह बचेंगे, वे पहले से अधिक दूर की कक्षाओं में पहुंच सकते हैं।
बुध और शुक्र का बचना मुश्किल
नई स्टडी के अनुसार, बुध और शुक्र के बचने की संभावना लगभग नहीं है, क्योंकि ये दोनों ग्रह सूरज के सबसे निकट हैं और रेड जायंट बनने के दौरान उसके भीतर समा सकते हैं। हालांकि पृथ्वी और मंगल के लिए स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है। यदि सूरज पर्याप्त द्रव्यमान खोता है, तो ये ग्रह अपनी कक्षा बदलकर सुरक्षित दूरी पर पहुंच सकते हैं।
पहले की स्टडी से कैसे अलग है नया शोध?
पहले के अध्ययनों में पुराने गणितीय मॉडल का इस्तेमाल किया गया था, जिनमें सूरज के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को अधिक माना गया था। नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने सूरज की बदलती आंतरिक संरचना, उसकी गति और तारकीय हवाओं (Stellar Winds) को भी शामिल किया, जिससे अधिक सटीक गणना संभव हो सकी।
अभी और शोध की जरूरत
इस शोध के प्रमुख वैज्ञानिक मैट्स एस्सेलड्यूर्स का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले सूरज जैसे अन्य वृद्ध तारों का विस्तृत अध्ययन करना आवश्यक है। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसे तारे अपने अंतिम समय में कितना द्रव्यमान खोते हैं और इसका उनके ग्रहों पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित Astronomy & Astrophysics जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
