OPEC से अलग होने के बाद UAE ने बढ़ाया रिकॉर्ड तेल उत्पादन, सऊदी अरब की बढ़ी चिंता, भारत को मिल सकता है बड़ा फायदा
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के OPEC और OPEC+ से अलग होने के फैसले के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय तक इस संगठन का हिस्सा रहे UAE ने अब अपनी तेल उत्पादन क्षमता का पूरी तरह उपयोग करना शुरू कर दिया है। 7 जुलाई 2026 को देश का कच्चे तेल का उत्पादन पिछले छह वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
तेजी से बढ़ा रहा है तेल निर्यात
रिपोर्टों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद UAE उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात पर भी जोर दे रहा है। इसका फायदा भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को मिल सकता है, क्योंकि अधिक आपूर्ति से कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, इस रणनीति ने वैश्विक तेल बाजार में सऊदी अरब की स्थिति को चुनौती देना शुरू कर दिया है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में हुई एक वर्चुअल बैठक में सऊदी अरब और रूस समेत प्रमुख उत्पादक देशों ने भी जुलाई 2026 से तेल की आपूर्ति बढ़ाने पर सहमति जताई है, ताकि बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखी जा सके।
क्या है OPEC और OPEC+?
OPEC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच तेल उत्पादन का समन्वय कर वैश्विक बाजार में कीमतों को संतुलित बनाए रखना है। वर्तमान में सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत सहित कई प्रमुख तेल उत्पादक देश इसके सदस्य हैं।
वहीं, वर्ष 2016 में OPEC+ का गठन किया गया, जिसमें रूस सहित अन्य बड़े तेल उत्पादक देशों को शामिल किया गया। इसका मकसद तेल की गिरती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए संयुक्त रणनीति बनाना था। अब UAE इन दोनों समूहों से अलग हो चुका है।
UAE ने क्यों बढ़ाया उत्पादन?
पिछले कुछ वर्षों में UAE ने तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है। OPEC से बाहर आने के बाद अब उस पर उत्पादन संबंधी कोटा लागू नहीं है, जिससे वह अपनी पूरी क्षमता के साथ तेल निकाल रहा है।
UAE सरकार का कहना है कि बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करना और अपने निवेश का अधिकतम लाभ उठाना उसकी प्राथमिकता है। हालांकि, अधिक उत्पादन के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ी है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर दबाव बना हुआ है और ओवरसप्लाई की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं।
वैश्विक बाजार पर क्या होगा असर?
दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरती है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिम पहले से ही बाजार को प्रभावित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में UAE का OPEC से बाहर होकर उत्पादन बढ़ाना वैश्विक तेल बाजार में प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता दोनों को बढ़ा सकता है।
भारत को मिल सकती है राहत
भारत अपनी तेल आवश्यकता का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं या घटती हैं, तो भारत का आयात बिल कम हो सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव घटने, महंगाई नियंत्रित रहने और अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं पर भी भारत की नजर बनी रहेगी।
सऊदी अरब के सामने नई चुनौती
सऊदी अरब लंबे समय से वैश्विक तेल बाजार का सबसे प्रभावशाली निर्यातक देश रहा है। लेकिन UAE के रिकॉर्ड उत्पादन और आक्रामक निर्यात ने उसकी बाजार हिस्सेदारी पर दबाव बढ़ा दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए सऊदी अरब उत्पादन बढ़ाने, एशियाई बाजारों में रियायती कीमतों पर तेल उपलब्ध कराने और अपनी रणनीतिक पाइपलाइन नेटवर्क का अधिक उपयोग करने जैसी रणनीतियां अपना सकता है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक तेल बाजार में कीमतों को लेकर नई प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
