वेनेजुएला से लौटे भारतीय नाविक के शव से कई अंग गायब होने का दावा, परिवार ने मौत की निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
- रिपोर्ट: सुरजीत सिंह
नई दिल्ली। वेनेजुएला में मई 2026 में हुई भारतीय नाविक राकेश चौहान की मौत अब गंभीर विवाद का विषय बन गई है। उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी 33 वर्षीय राकेश चौहान के परिजनों ने भारत में कराए गए दोबारा पोस्टमार्टम (री-ऑटोप्सी) के आधार पर दावा किया है कि उनके शव से दिमाग, दिल, फेफड़े, किडनी, लिवर समेत कई महत्वपूर्ण अंग गायब थे। इस खुलासे के बाद ‘फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया’ (एफएसयूआई) ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
परिजनों के अनुसार, राकेश चौहान नवंबर 2025 में मर्चेंट नेवी के एक जहाज पर क्रू मेंबर के रूप में वेनेजुएला गए थे। मई 2026 में उनकी मौत की सूचना शिपिंग कंपनी ने परिवार को दी। शुरुआत में कंपनी ने बताया कि जहाज पर गिरने से वह घायल हो गए थे और उनका इलाज चल रहा था। बाद में गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत होने की जानकारी दी गई।
परिवार का आरोप है कि कंपनी ने पहले शव एक सप्ताह के भीतर भारत भेजने का आश्वासन दिया था, लेकिन करीब एक महीने बाद 4 जून को शव भारत पहुंचा। सबसे गंभीर बात यह रही कि शव के साथ वेनेजुएला की ओर से कोई आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट या मौत के कारण से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया।
इसके बाद जिला प्रशासन की अनुमति से देवरिया में दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि शव पर पहले से पोस्टमार्टम के निशान मौजूद थे और गर्दन से लेकर प्यूबिक सिम्फिसिस तक तथा सिर के पिछले हिस्से पर टांके लगे हुए थे। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि शव से दिमाग, दिल, दोनों फेफड़े, लिवर, किडनी, प्लीहा, अग्न्याशय, पेट, आंतें, थायरॉयड, स्वरयंत्र, श्वास नली सहित कई आंतरिक अंग अनुपस्थित थे। ऐसे में मृत्यु का सटीक कारण निर्धारित करना संभव नहीं हो सका।
फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी कर कहा कि बिना आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेजों के शव भारत भेजा जाना बेहद गंभीर मामला है। संगठन ने वेनेजुएला के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, भारतीय दूतावास के तत्काल हस्तक्षेप, पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा मृतक के परिवार को न्याय और उचित मुआवजा देने की मांग की है।
हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि फोरेंसिक जांच के दौरान कुछ अंगों को परीक्षण के लिए निकाला जाना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन इस मामले में विवाद इसलिए गहरा गया है क्योंकि परिवार को न तो अंगों के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी दी गई और न ही वेनेजुएला के अधिकारियों अथवा शिपिंग कंपनी की ओर से मृत्यु के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई।
फिलहाल मृतक का परिवार पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राकेश चौहान की मौत किन परिस्थितियों में हुई और शव से आंतरिक अंग क्यों गायब मिले।
