जनपद में प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं कृषक गोष्ठी का किया गया भव्य आयोजन

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जुटे अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और किसान।

  • रिपोर्ट: शाहबाज़ खां

रामपुर: सुशासन को समर्पित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, सुशासन, संस्कार एवं सम्मान के साथ 140 करोड़ भारतीयों की निरंतर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जिलाधिकारी अजय कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश गंगवार, पूर्व सांसद घनश्याम सिंह लोधी, राज्य महिला आयोग सदस्य सुनीता सिंह सैनी की उपस्थिति में विकास भवन परिसर में प्राकृतिक एवं प्रगतिशील खेती कार्यशाला तथा कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण एवं कृषक जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद स्तरीय कृषक गोष्ठी-2026 का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व सांसद घनश्याम सिंह लोधी ने कृषकों से उन्नत एवं प्राकृतिक खेती पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को प्रतिवर्ष 6000 रुपये की सहायता तथा सिंचाई के लिए अनुदानित दरों पर सोलर पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

उप कृषि निदेशक राम किशन सिंह ने कृषि विभाग द्वारा संचालित किसान हितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जीवामृत के निर्माण का लाइव प्रदर्शन किया तथा किसानों को इसके प्रयोग की विधि से अवगत कराया। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और प्राकृतिक खेती अपनाने के लाभों पर प्रकाश डाला।

A grand natural farming workshop and farmers' meet was organized in the district.

जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा ने उर्वरकों की बुकिंग की नई व्यवस्था तथा “फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल” ऐप के माध्यम से उर्वरक बुकिंग की प्रक्रिया की जानकारी दी और किसानों को डिजिटल माध्यमों के उपयोग के लिए प्रेरित किया।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. नरेन्द्र सिंह ने प्राकृतिक खेती के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से जानकारी देते हुए जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, आच्छादन एवं वाफसा आधारित तकनीकों के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत घटती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है।

डॉ. अनुज बंसल ने प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों, फसल विविधीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक आदानों के उपयोग तथा जल संरक्षण उपायों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने किसानों को गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त करने एवं कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।

कार्यक्रम के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों द्वारा किया गया। किसानों ने विशेषज्ञों से संवाद स्थापित करते हुए प्राकृतिक खेती के प्रति विशेष रुचि दिखाई और अपने खेतों में प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों तथा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रशस्ति-पत्र एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को नवीन कृषि तकनीकों, योजनाओं एवं नवाचारों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की लागत कम करने का माध्यम है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार तथा टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने किसानों से अधिकाधिक संख्या में प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि 19 जून 2026 को भी विकास भवन परिसर में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या कृषकों, जनप्रतिनिधियों, कृषि वैज्ञानिकों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सहभागिता की।

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