महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा दावा: शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने बनाया अलग गुट, स्पीकर को दी सूचना
महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा के बीच बड़ा राजनीतिक दावा
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार के मंत्री संजय शिरसाट ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों ने अलग गुट बना लिया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखित रूप से सूचित भी कर दिया है।
हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सांसदों के हाथ में आगे का फैसला : संजय शिरसाट
पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय शिरसाट ने कहा कि अलग गुट बनाने की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित सांसद स्वयं तय करेंगे कि उन्हें आगे किस राजनीतिक दल के साथ जाना है।
शिरसाट ने कहा, “सांसदों ने अलग समूह बनाकर लोकसभा अध्यक्ष को इसकी जानकारी दे दी है। आगे वे स्वयं तय करेंगे कि किस पार्टी में शामिल होना है।”
एकनाथ शिंदे लेंगे अंतिम फैसला
संजय शिरसाट ने कहा कि यदि ये सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होना चाहते हैं, तो इस पर अंतिम निर्णय एकनाथ शिंदे ही लेंगे।
उन्होंने कहा कि शिंदे का जो भी फैसला होगा, पार्टी के सभी नेता उसे स्वीकार करेंगे।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब यह पूरा मामला काफी हद तक संबंधित सांसदों के हाथ में है।
शिवसेना (यूबीटी) ने बागियों को दी चेतावनी
दूसरी ओर, संभावित टूट की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने भी अपना रुख सख्त कर लिया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत तथा लोकसभा सांसद अरविंद सावंत ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संभावित बागियों को स्पष्ट संदेश दिया।
दोनों नेताओं ने कहा कि पार्टी संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विरासत के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और पार्टी किसी भी तरह की गद्दारी बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी को विभाजित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लड़ाई लड़ी जाएगी।
संसदीय दल की बैठक से पहले बढ़ी हलचल
यह संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली स्थित शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले आयोजित की गई।
इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसद आगे क्या फैसला लेते हैं।
