- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। आध्यात्मिक नगरी काशी एक बार फिर शिवभक्ति के रंग में रंगने को तैयार है। अगले महीने गुरु पूर्णिमा के साथ सावन मास का शुभारंभ होगा और बाबा विश्वनाथ की नगरी में “बम-बम भोले” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठेगा। श्रद्धालु अभी से दर्शन-पूजन की तैयारियों में जुट गए हैं, वहीं होटल और धर्मशालाओं में बुकिंग का दौर भी तेज हो गया है।
29 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलने वाले सावन मास में लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इस दौरान काशी की गलियां कांवड़ियों और श्रद्धालुओं से गुलजार रहेंगी। सावन के चारों सोमवार—3, 10, 17 और 24 अगस्त—पर विशेष भीड़ उमड़ने की संभावना है। खासकर 10 अगस्त को प्रदोष व्रत के संयोग के कारण श्रद्धा का उत्साह चरम पर रहने का अनुमान है।
सावन के दौरान मां गंगा का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की स्थिति बनने की संभावना के मद्देनजर जल पुलिस तथा एनडीआरएफ की टीमें भी पूरी तरह सक्रिय रहेंगी। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे सावन माह में रूट डायवर्जन लागू रहेगा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष योजना तैयार की गई है।
श्रद्धालुओं के लिए जलपान, विश्राम और ठहरने की विशेष व्यवस्था की जाएगी। वहीं स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों ने भी सावन मेले को देखते हुए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। खरीदारी करने आने वाले भक्तों के लिए आकर्षक छूट और ऑफर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
सावन केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत का भी जीवंत उत्सव है। इस दौरान भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोकगीत, नृत्य और धार्मिक आयोजनों से पूरी नगरी शिवमय हो जाएगी। हर ओर भक्ति, उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जिससे काशी एक बार फिर विश्वभर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी।
