हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल जी की पुण्यतिथि पर विशेष 

गुस्ताखी माफ हरियाणा– पवन कुमार बंसल

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल जी की पुण्यतिथि पर विशेष 

लोगों का दिल जीतने वाले नेता थे भजनलाल
हरियाणा की राजनीति के “चाणक्य”, दलबदल की राजनीति के “पीएचडी” और गैर-जाट राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाने वाले स्वर्गीय भजनलाल केवल अपनी राजनीतिक कौशल के लिए ही नहीं, बल्कि लोगों का दिल जीतने की अपनी अनोखी कला के लिए भी जाने जाते थे।
प्रसिद्ध पत्रिका रविवार में भजनलाल की तीखी आलोचना करते हुए लंबा लेख लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार उदयन शर्मा ने भी स्वीकार किया था कि भजनलाल में एक विलक्षण गुण था। उनका कहना था कि यदि उनका कट्टर विरोधी भी उनसे अकेले में एक बार मिल ले, तो या तो वह उनका प्रशंसक बन जाता था या फिर उसके विरोध की तीव्रता काफी कम हो जाती थी।

“वह हर किसी को हर चीज दे सकते हैं” — सुषमा स्वराज
पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज ने एक बार कहा था कि भजनलाल में ऐसी विशेषता थी कि वे “हर किसी को हर चीज दे सकते हैं।”
अपनी राजनीतिक चतुराई से बंसीलाल जैसे कद्दावर नेता को कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर कर देने वाले भजनलाल जीवन के अंतिम दौर में भूपेंद्र सिंह हुड्डा से राजनीतिक रूप से मात खा गए थे। वे स्वयं मजाक में कहा करते थे कि यदि उन्हें अंग्रेज़ी अच्छी तरह आती, तो शायद ऐसा नहीं होता।

चुनरी बेचने वाले से केंद्रीय मंत्री तक

भजनलाल का जीवन संघर्ष और सफलता की अद्भुत कहानी है। चुनरी बेचने वाले एक साधारण व्यक्ति से लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री बनने तक का उनका सफर असाधारण रहा।
लोगों से आत्मीय संबंध बनाना उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। अपने ऐच्छिक कोटे से उन्होंने जहां पत्रकारों, अधिकारियों, न्यायाधीशों और कांग्रेस नेतृत्व को प्लॉट आवंटित किए, वहीं अपने चपरासियों, ड्राइवरों और निजी स्टाफ का भी पूरा ध्यान रखा।
एक बार मुख्यमंत्री रहते हुए वे सचिवालय की लिफ्ट से नीचे आ रहे थे। उन्होंने लिफ्ट ऑपरेटर से पूछा कि वह कहां का रहने वाला है। जब उसने बताया कि वह करनाल जिले के एक गांव का निवासी है, तो भजनलाल ने पूछा कि क्या उसने करनाल में मकान बनाया है। नकारात्मक उत्तर मिलने पर उन्होंने अपने पीआरओ अरुण जोहर को बुलाकर उसकी दरखास्त तैयार करवाई। परिणामस्वरूप उसे करनाल में प्लॉट मिला और किश्त जमा कराने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई।

इस कलमघसीट को भी प्लॉट का प्रस्ताव दिया 

भजनलाल ने इस लेखक को भी कई बार प्लॉट लेने का प्रस्ताव दिया था, जिसे मैंने सम्मानपूर्वक अस्वीकार कर दिया। हालांकि रोहतक में नियुक्ति के दौरान उनके हस्तक्षेप से मुझे सरकारी आवास अवश्य आवंटित हुआ था।

देवीलाल सरकार का तख्तापलट और कांग्रेस की वापसी
1980 के लोकसभा मध्यावधि चुनावों के बाद पूरी जनता पार्टी सरकार को कांग्रेस सरकार में बदल देना भजनलाल की राजनीतिक कला का सबसे चर्चित उदाहरण माना जाता है। देवीलाल सरकार का तख्तापलट कर स्वयं मुख्यमंत्री बन जाना उनकी राजनीतिक रणनीति की मिसाल था।

जाटों का दिल जीतने की कोशिश
भजनलाल पर अक्सर गैर-जाट राजनीति करने और जाट समुदाय का विरोधी होने के आरोप लगाए गए। लेकिन वास्तविकता यह भी है कि उन्होंने जाट समाज का समर्थन प्राप्त करने के लिए अनेक प्रयास किए।
वे जनसभाओं में कहा करते थे कि “बिश्नोई भी जाट ही होते हैं।” अपने हाथों पर पड़े कथित छाले दिखाकर बताते थे कि खेती-बाड़ी और दरांती चलाने से ये निशान पड़े हैं। जब जाट समाज से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, तब उन्होंने गैर-जाट राजनीति की राह पकड़ी।
फिर भी उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में जाट नेताओं को स्थान दिया और धर्मपाल मलिक जैसे जाट नेता को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया।
बंसीलाल, चौधरी देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला को छोड़ दें तो अधिकांश जाट नेताओं ने भजनलाल की राजनीतिक क्षमता और जनसंपर्क कौशल की सराहना की। चाहे वे बीरेंद्र सिंह हों, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रघुबीर कादियान, आनंद दांगी, सुल्तान सिंह, शमशेर सिंह सुरजेवाला या रणदीप सिंह सुरजेवाला।
आनंद दांगी ने तो मेहम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर भजनलाल को “चौबीसी रत्न” की उपाधि तक प्रदान की थी। वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रोहतक की एक सभा में उन्हें “देवता समान” बताया था।

आदमपुर का देसी घी
भजनलाल के कारण आदमपुर का देसी घी केवल हरियाणा या भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक चर्चित हो गया था। यह उनके व्यक्तित्व और प्रभाव का ही परिणाम था कि उनके क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुई।

अफसरों, पत्रकारों और हाईकमान को साधने की कला
भजनलाल के शासनकाल को बिश्नोई समाज का स्वर्णकाल कहा जा सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों और कांग्रेस हाईकमान के साथ संबंध बनाए रखने और उन्हें संतुष्ट रखने की कला में उनका कोई सानी नहीं था।
आज उनके एक पुत्र चंद्रमोहन कांग्रेस में हैं, जबकि दूसरे पुत्र कुलदीप बिश्नोई भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय हैं।
हाल ही में राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा भजनलाल के संबंध में की गई एक टिप्पणी से कुलदीप बिश्नोई नाराज हो गए थे। बाद में रेखा शर्मा ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं उन्हें मनाने के लिए उनके निवास पर पहुंचे।
भजनलाल को लेकर मतभेद हो सकते हैं,वउन पर करप्शन को बढ़ावा देने और दलबदल को बढ़ावा देने के आरोप लगे.. उनकी राजनीति पर बहस हो सकती है, लेकिन इस बात से शायद ही कोई इनकार कर सके कि लोगों का दिल जीतने की जो कला उनमें थी, वह उन्हें हरियाणा की राजनीति में एक अलग और विशिष्ट स्थान दिलाती है।

About The Author

Leave A Reply

Your email address will not be published.