ऐलनाबाद 1 जून (एम पी भार्गव): शहर के गौशाला रोड स्थित सनातन धर्मशाला में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस कथा में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री सौम्या भारती जी द्वारा समस्त धार्मिक ग्रंथों के समन्वय से प्रभु के जन्म एवं उनके जीवन की लीलाओं में छिपे आध्यात्मिक रहस्यों को भावपूर्ण ढंग से उजागर किया गया।
उन्होंने अपने प्रवचनों में बताया कि यह कथा केवल प्रभु की जीवन गाथा का वर्णन नहीं है, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जो प्रभु के अवतरण एवं प्राकट्य के दिव्य रहस्यों को स्पष्ट करती है। साध्वी जी ने कहा कि प्रभु का अवतरण धर्म स्थापना के लिए होता है, जो हर युग, काल और देश की सीमाओं से परे है तथा वर्तमान समय की समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करता है।
उन्होंने बताया कि संसार में रोग, शोक, जन्म-मृत्यु तथा काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार में फंसे मानव को सत्मार्ग पर लाने के लिए प्रभु अवतरित होते हैं और अधर्म का नाश कर धर्म की पुनः स्थापना करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण को सृष्टि के पालनकर्ता एवं नियामक तत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि निराकार परमात्मा धर्म की स्थापना हेतु साकार रूप धारण करता है और प्रत्येक मानव को अपने भीतर ही ईश्वर का अनुभव कराने का मार्ग दिखाता है।

प्रभु के रात्रि में जन्म लेने का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि यह अज्ञान रूपी अंधकार के अंत और ज्ञान के प्रकाश के प्रकट होने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रभु का जन्म कारागार में होना हमारे मानव तन का प्रतीक है, जिसमें ईश्वर का वास है, लेकिन माया के कारण मनुष्य उनके दर्शन नहीं कर पाता। जब तक मनुष्य माया के बंधनों से मुक्त नहीं होता, तब तक प्रभु के दर्शन और मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। साध्वी जी ने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे माता देवकी ने अपने हृदय में प्रभु के चतुर्भुज रूप के दर्शन किए, उसी प्रकार मनुष्य भी सतगुरु की कृपा से अपने भीतर ईश्वर का अनुभव कर सकता है। इस अवसर पर पूजन
संजय सिंगला के परिवार व राजू मिशन के परिवार द्वारा करवाया गया। कार्यक्रम में रवि कुमार जसरासरिया, देवेन्द्र गोयल, अंजनी लढ़ा, गौरी शंकर लढ़ा, सुभाष तलवाड़िया एवं विनोद कुमार अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस भव्य कथा आयोजन में अन्य साध्वी बहनें भी अपने वाद्य-वृंद समूह के साथ उपस्थित रहीं, जिनके मधुर भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
