भालू का फ़सल को नुकसान पहुंचाने पर मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन

  • रिपोर्ट- जीतेन्द्र जोशी

देहरादून में जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसलों को लगातार पहुंचाए जा रहे नुकसान के विरोध में आज आरआर पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने वन विभाग मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई।

वाइल्डलाइफ अधिकारी विवेक पांडे के माध्यम से भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री तक अपना आक्रोश पहुंचाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि भालू और अन्य जंगली जानवरों द्वारा फसलें बर्बाद किए जाने के बावजूद किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जबकि सियार और बंदरों से नुकसान होने पर मुआवजा दिया जाता है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद ने कहा कि किसान पहाड़ की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भालू और अन्य वन्य जीवों के हमलों से किसानों की मेहनत बर्बाद हो रही है और सरकार आंख मूंदे बैठी है।

प्रदर्शन के दौरान पौड़ी गढ़वाल समेत पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते जंगली जानवरों के आतंक को लेकर भी चिंता जताई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तेंदुए, जंगली सूअर, भालू और अन्य वन्य जीवों के हमलों से पहाड़ के लोग डरे और सहमे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब चुप रहने का समय नहीं है और संगठित संघर्ष किया जाएगा।

आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें जंगली जानवरों के हमलों में प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के लिए बाउंड्री योजना लागू करने, किसानों के खेतों में तारबाड़ और सोलर फेंसिंग की व्यवस्था करने तथा रिखणीखाल-नैनीडांडा क्षेत्र की ओर बंद गेट खोलने की मांग शामिल है।

इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में बदलाव करने की भी मांग उठाई, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और किसानों को राहत मिल सके।

मुख्य मांगें
जंगली जानवरों के हमलों में शिकार परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
किसानों की फसलों को भालू और अन्य जंगली जानवरों से हुए नुकसान पर मुआवजा दिया जाए।
जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के लिए बाउंड्री योजना बनाई जाए।
गांवों में खेती कर रहे किसानों के खेतों के लिए तारबाड़ और सोलर फेंसिंग की व्यवस्था की जाए।
रिखणीखाल और नैनीडांडा क्षेत्र की ओर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के सभी गेट खोले जाएं।
वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में बदलाव किया जाए।
पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते तेंदुए, भालू, जंगली सूअर और अन्य वन्य जीवों के आतंक से लोगों को सुरक्षा दी जाए।
पहाड़ के किसानों और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए सरकार ठोस और स्थायी नीति लागू करे।

 

 

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