शनि देव महाराज जन्मोत्सव 2026: इस बार शनि देव जन्मोत्सव पर बन रहा है महायोग: धर्मेंद्र भार्गव निमोद

ऐलनाबाद,12 मई (एम पी भार्गव) -शनि देव महाराज के जन्मोत्सव पर इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से साधना, पूजा-अर्चना एवं दान-पुण्य के लिए अत्यंत श्रेष्ठ महायोग बन रहा है। वर्तमान में अधिकमास चल रहा है और इसी बीच 27 वर्षों बाद दुर्लभ शनिश्चरी अमावस्या का अद्भुत संयोग निर्मित हो रहा है।
धर्मेंद्र भार्गव निमोद, अध्यक्ष अखिल भारतीय भृगुवंशी भार्गव समाज धर्मशाला पुष्कर के अनुसार, यह महायोग 16 मई 2026, शनिवार को भरणी नक्षत्र, सौभाग्य योग एवं चतुष्पद करण की साक्षी में बन रहा है। लगभग 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनिश्चरी अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। इससे पूर्व यह योग 15 मई 1999 को बना था।
यह विशेष संयोग अधिकमास प्रारंभ होने से ठीक एक दिन पूर्व बन रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से साधना, तप, दान-पुण्य एवं शनि उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। ग्रह-गोचर की स्थिति इस बार अत्यंत प्रभावशाली एवं दुर्लभ मानी जा रही है।
इस अवसर पर बुधादित्य योग के साथ गजछाया योग का भी प्रभाव रहेगा। शुक्र का स्वग्रही होना इस योग को और अधिक विशेष बना रहा है। ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या शनि साधना, पूजा-पाठ, दान-धर्म एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ मानी गई है।
राहुल भार्गव प्रचार मंत्री ने बताया कि जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया, महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, उन्हें इस दिन अपने घर में या शनि देव मंदिर में हवन अवश्य करवाना चाहिए।
इस दिन सरसों का तेल, नीले पुष्प, उड़द, चायपत्ती, नारियल, चीनी, लोहे की वस्तुएँ, भुने हुए चने एवं काले वस्त्रों का दान विशेष फलदायी माना गया है। शनि महाराज को खीर का प्रसाद भी अत्यंत प्रिय है। इस पावन अवसर पर व्यक्ति को तनाव एवं चिंता से दूर रहकर सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।
शनि देव अपनी राशि कुंभ में रहकर भरणी नक्षत्र में भ्रमण करेंगे। इस दौरान कई शुभ योग भी बन रहे हैं—
केदार योग :
यह योग भगवान शनि देव एवं भगवान शिव की कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है। यह योग करियर में सफलता एवं भाग्य वृद्धि का कारक है।
गजकेसरी योग :
गुरु एवं चंद्रमा की स्थिति से बनने वाला यह योग सुख-समृद्धि, मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि करने वाला माना जाता है।
शोभन योग :
इस योग में पूजा-पाठ, हवन एवं दान-पुण्य का दोगुना फल प्राप्त होने की मान्यता है।
न्याय के देवता शनि देव का नाम सुनते ही कई लोग भयभीत हो जाते हैं। साढ़ेसाती एवं ढैया जैसे शब्द लोगों के मन में डर उत्पन्न करते हैं, लेकिन ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि देव न्यायप्रिय देवता हैं। वे प्रत्येक मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए भयभीत होने के बजाय अपने कर्मों को सुधारने की आवश्यकता है। अच्छे कर्म करने वालों पर शनि देव सदैव कृपा बनाए रखते हैं।
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को प्रातः 5:11 बजे प्रारंभ होगी तथा 17 मई, रविवार को दोपहर 1:36 बजे तक रहेगी।
इस अवसर पर प्रत्येक नगर एवं गाँव के शनि देव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी तथा भक्तगण उत्साहपूर्वक पूजा-अर्चना करेंगे। यह समय जीवन में नए उद्देश्य एवं सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला माना जा रहा है। दूरदर्शिता एवं सकारात्मक सोच से व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है।
इस दिन प्रातःकाल जल में गुड़, काले तिल एवं दूध मिलाकर पीपल वृक्ष पर अर्पित करना चाहिए तथा पीपल देवता की सात परिक्रमा करनी चाहिए। यह दिन दान-पुण्य के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।
निमोद ग्राम स्थित इच्छापूर्ण कष्ट हरण न्यायाधीश सूर्यपुत्र शनिदेव मंदिर में इस अवसर पर भव्य महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में हवन में शामिल होने का आग्रह किया है।
मान्यता है कि हवन में सम्मिलित होने से घर-परिवार में सुख-शांति, प्रेम, स्नेह एवं समृद्धि बढ़ती है तथा कष्ट, पीड़ा एवं परेशानियाँ दूर होती हैं।
हवन में सम्मिलित होने वाले श्रद्धालु मंदिर पुजारी जी से संपर्क अवश्य करें। ऐसे दुर्लभ संयोग बहुत कम अवसरों पर प्राप्त होते हैं।
नेमीचंद जोशी संरक्षक ने बताया कि शनि देव महाराज के मंदिर निमोद में हवन में बैठने वाले श्रद्धालुओं के लिए उत्तम व्यवस्था की जाएगी। हवन का आयोजन विद्वान पंडित श्री सुधीर शर्मा (मौलासर वाले) द्वारा सम्पन्न कराया जाएगा तथा गुरुकुल के विद्यार्थी भी उपस्थित रहेंगे।

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