मनुष्य को अपने जीवन में सदैव धर्म, सत्य, और सेवा का मार्ग अपनाना चाहिए, ताकि उसे ऐसे कष्टों का सामना न करना पड़े :भरत मुनि जी उदासीन
ऐलनाबाद,29 अप्रैल( एम पी भार्गव) । शहर के वार्ड नंबर 9 में स्थित प्राचीन श्रीराम मंदिर के प्रांगण में महिला मंडल द्वारा श्री मद भागवत कथा का भव्य एवं पावन कार्यक्रम श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ किया जा रहा है। इस दिव्य कथा का वाचन परम पूज्य श्री श्री 108 महंत श्री भरत मुनि जी उदासीन (श्री पंचमुखी मंदिर)महाराज द्वारा किया जा रहा है, जिनकी मधुर वाणी एवं सरल शैली श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति रस से सराबोर कर रही है। कथा के दौरान भरत मुनि जी महाराज ने जड़ भरत की कथा का अत्यंत मार्मिक एवं शिक्षाप्रद वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि जड़ भरत पूर्व जन्म में एक महान राजा थे, जिन्होंने अंत समय में हिरण के प्रति मोह कर लिया, जिसके कारण उन्हें अगले जन्म में हिरण योनि प्राप्त हुई। इसके पश्चात तीसरे जन्म में उन्होंने जड़ भरत के रूप में जन्म लिया और संसार के मोह-माया से दूर रहते हुए पूर्ण वैराग्य का जीवन अपनाया। मुनि जी ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि मनुष्य को अपने जीवन में मोह और आसक्ति से बचते हुए भगवान की भक्ति में लीन रहना चाहिए। जड़ भरत की कथा हमें यह सिखाती है कि अंत समय की भावना ही हमारे अगले जन्म का निर्धारण करती है, इसलिए हर क्षण ईश्वर स्मरण आवश्यक है।
कथा व्यास परम पूज्य गुरुदेव महाराज श्री भरतमुनि जी ने अपने अमृतमय वचनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को नरक में मिलने वाली विभिन्न यातनाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा के इस प्रसंग ने श्रोताओं को आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित कर दिया।भरत मुनि जी ने बताया कि श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुसार, मनुष्य अपने कर्मों के आधार पर ही स्वर्ग और नरक की प्राप्ति करता है।
जो व्यक्ति जीवन में अधर्म, पाप, छल-कपट, हिंसा, झूठ, और दूसरों को कष्ट देने जैसे कर्म करता है, उसे मृत्यु के पश्चात नरक में कठोर दंड भुगतने पड़ते हैं। मुनि ने विस्तार से बताया कि नरक में जीवात्मा को अनेक प्रकार की पीड़ाएं सहनी पड़ती हैं, जैसे-
अग्नि की प्रचंड ज्वालाओं में जलना,खौलते हुए तेल में डाला जाना,कांटों और नुकीले औजारों से शरीर को घायल किया जाना, भूख-प्यास से तड़पना, यमदूतों द्वारा कठोर यातनाएं देना आदि। श्री भरतमुनि जी ने कहा कि ये सभी यातनाएं केवल डराने के लिए नहीं, बल्कि मनुष्य को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने के लिए वर्णित की गई हैं। उन्होंने कहा कि “मनुष्य को अपने जीवन में सदैव धर्म, सत्य, और सेवा का मार्ग अपनाना चाहिए, ताकि उसे ऐसे कष्टों का सामना न करना पड़े।
“कथा के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि भगवान का भजन, सत्संग, दान-पुण्य और अच्छे कर्म ही मनुष्य को नरक की यातनाओं से बचाकर मोक्ष की ओर ले जाते हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने गुरुदेव के उपदेशों को श्रद्धापूर्वक सुना। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा श्रवण कर रहे हैं ओर शहर के गायक रामनिवास रसिया भी भजनों से अपनी सेवा प्रतिदिन प्रदान कर रहे है।इस मौके पर भारी संख्या में महिलाएं व पुरुष कथा सुनने के लिए मौजूद थे ।
