- रिपोर्ट- हरिश्चंद्र
कासगंज। 33% महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के पारित होने के बावजूद इसके तत्काल लागू न होने और इसे जनगणना व परिसीमन प्रक्रिया से जोड़े जाने के कारण महिलाओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में कासगंज जनपद के मानपुर नगरिया में मंडल अध्यक्ष मनोज चौहान एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख सहावर विजेंद्र सिंह गौर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि 2029 तक बिल लागू होने की योजना ने उनके अधिकारों को फिर से अनिश्चितता में डाल दिया है। उनका आरोप है कि पिछले कई दशकों से महिला आरक्षण का मुद्दा अधर में लटका हुआ है और अब भी इसे टालने की कोशिश की जा रही है।
विपक्षी दलों ने इस बिल को चुनावी स्टंट करार देते हुए महिलाओं के अधिकारों से समझौता बताया है। उनका कहना है कि बिना ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा दिए यह कानून अधूरा है। वहीं सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष पर ही इस प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा 543 सीटों में ही आरक्षण लागू किया जा सकता था, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। इस मुद्दे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप के चलते बिल के मूल उद्देश्य पर भी सवाल उठने लगे हैं।
महिलाओं का कहना है कि देश की आधी आबादी अब और इंतजार करने को तैयार नहीं है। 30 साल से अधिक समय से लंबित इस मांग के पूरा न होने से उनमें गहरा असंतोष है, जो अब सड़कों पर प्रदर्शन के रूप में सामने आ रहा है।
