“गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा- पवन कुमार बंसल”
सौजन्य: जानी-मानी शायरा सुमिता मिश्रा
“क्या कभी गीदड़ की धमकी से शेर को डरते देखा है?
और अगर शेर कुछ पल के लिए खामोश हो जाए,
तो क्या गीदड़ को जंगल का राजा बनते देखा है?”
हरियाणा की एसीएस मैडम मिश्रा की यह पंक्तियाँ आज की सियासी परिस्थितियों पर गहरा संकेत देती हैं। इन शब्दों के जरिए सत्ता, ताकत और खामोशी के मायने समझाने की कोशिश की गई है।
अब सवाल यही है कि हरियाणा की मौजूदा राजनीति में ‘शेर’ कौन है और ‘गीदड़’ कौन? यह फैसला जनता और पाठकों पर छोड़ देना ही बेहतर है।
