गुस्ताख़ी माफ़… हरियाणा-— पवन कुमार बंसल
(सौजन्य: जानी मानी लेखिका और शायरा सुमिता मिश्रा)
“ दुनिया और ज़िंदगी में
कुछ रिश्ते यूँ ही बन जाते हैं,
ना मुलाक़ात, ना पहचान,
फिर भी दिल के क़रीब आ जाते हैं।
कुछ लोग बिना मिले ही
दुआओं में शामिल रहते हैं,
निस्स्वार्थ भाव से
आपके लिए शुभचिंतक बन जाते हैं।
वो याद दिलाते हैं अक्सर,
कि ईश्वर की कृपा अनगिनत रूपों में होती है—
कभी किसी अपने के ज़रिए,
तो कभी किसी अजनबी के रूप में मिलती है।”
