पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Israel Iran US Ceasefire की घोषणा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत दी है। इस अहम कूटनीतिक घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को भी राहत मिली है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का असर
पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार की अशांति का सीधा असर Hormuz Strait पर पड़ता है। यह दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक कच्चा तेल गुजरता है।
तनाव के दौरान बढ़ी कीमतें
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। आपूर्ति बाधित होने के डर से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो यूक्रेन युद्ध के बाद का उच्चतम स्तर था।
सीजफायर के बाद गिरावट
सीजफायर की घोषणा होते ही बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। लंबे समय से 100 डॉलर के ऊपर बने रहने के बाद तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड में करीब 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई और यह घटकर 94.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क WTI में 23 प्रतिशत तक गिरावट आई और यह 97.12 डॉलर पर पहुंच गया।
ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव
मार्च महीने में युद्ध के कारण तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी, जो एक महीने में सबसे बड़ी उछाल मानी जा रही है। इस स्थिति को 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट माना जा रहा था।
वैश्विक असर
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के चलते कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबू हो गई थीं और महंगाई बढ़ गई थी। अब सीजफायर के बाद जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति बेहतर होगी और वैश्विक बाजार को स्थिरता मिलेगी।
