जब सीएम देवीलाल ने IAS अधिकारी से पूछा—‘भजनलाल पैसे कैसे लेते थे?’: ‘गुस्ताखी माफ, हरियाणा’ में दिलचस्प किस्सा

चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति, संस्कृति और प्रशासनिक तंत्र पर आधारित आगामी पुस्तक “Murky Politics of Haryana” से लिए गए एक रोचक अंश में पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया है। लेखक पवन कुमार बंसल की पुस्तक “Gustakhi Maaf, Haryana” में ऐसे कई जीवंत और चुटीले प्रसंगों का जिक्र किया गया है।

चौधरी देवीलाल, जिन्हें ‘ताऊ’ के नाम से जाना जाता था, अपने बेबाक और अप्रत्याशित अंदाज के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, बाद में असंतोष होने पर उन्होंने वी.पी. सिंह को “राजा नहीं, भिखारी—देश पर धब्बा” तक कह दिया था।

हरियाणा की राजनीति में देवीलाल के अलावा बंसीलाल और भजनलाल जैसे नेताओं के इर्द-गिर्द भी कई चर्चित किस्से प्रचलित रहे हैं। वहीं, मौजूदा दौर में मनोहर लाल खट्टर को अपेक्षाकृत संयमित नेता माना जाता है, जिनसे जुड़े हल्के-फुल्के किस्से कम और सख्त व विवादित प्रसंग ज्यादा चर्चा में रहते हैं।

जीप खरीद बैठक का किस्सा
एक हाई-पावर परचेज कमेटी की बैठक के दौरान पुलिस के लिए जीप खरीदने सहित कई प्रस्तावों पर विचार हो रहा था। योजना महिंद्रा कंपनी से वाहन खरीदने की थी। इसी बैठक में देवीलाल ने सप्लाई एंड डिस्पोजल विभाग के प्रमुख रहे आईएएस अधिकारी एन.के. जैन से सीधे सवाल किया, “बताओ, भजनलाल पैसे कैसे लेते थे?”

जैन ने इस बारे में जानकारी न होने की बात कही, लेकिन देवीलाल संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने महिंद्रा डीलरशिप के मालिक को बुलाने का निर्देश देते हुए कहा, “भजनलाल सूटकेस भरकर पैसे लेते थे, मैं सबके सामने पार्टी फंड के लिए खुलेआम लूंगा।”

इस पर जैन ने संभावित विवाद का हवाला देते हुए महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री ए.आर. अंतुले के ट्रस्ट विवाद का उदाहरण दिया, लेकिन देवीलाल ने पलटकर कहा, “क्या तुम मुझे डराने की कोशिश कर रहे हो?” अंततः उनके सचिव मलिक साहब के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।

देवीलाल अपनी उदारता के लिए भी जाने जाते थे। एक बार चंडीगढ़ के एक पत्रकार को, जो अपने बेटे की शादी का निमंत्रण देने आए थे, उन्होंने नकदी से भरा बैग देते हुए भव्य तरीके से शादी करने को कहा। बैग में रखी रकम देखकर पत्रकार भी हैरान रह गया।

एक अन्य प्रसंग में उन्होंने आईएएस अधिकारी अनिल रजदान से बंसीलाल के “पैसे संभालने के तरीके” पर सवाल किया और मजाक में रजदान की पत्नी रजनी रजदान से कहा, “मुख्यमंत्री तुम हो या मैं?”

पुस्तक में ऐसे कई दिलचस्प और हास्य से भरपूर किस्से शामिल हैं, जो हरियाणा की राजनीतिक संस्कृति की अनोखी झलक पेश करते हैं। यह किताब न सिर्फ मनोरंजन का माध्यम बनेगी, बल्कि पाठकों को प्रदेश की राजनीति के अनकहे पहलुओं से भी रूबरू कराएगी।

About The Author

Leave A Reply

Your email address will not be published.