पाली, राजस्थान, मार्च 2026। रेमन मैगसेसे पुरस्कार (2025) प्राप्त करने वाली संस्था एजुकेट गर्ल्स ने पाली में दीक्षांत समारोह का आयोजन कर ‘प्रगति’ कार्यक्रम के तहत कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले शिक्षार्थियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सामुदायिक नेता, सरकारी प्रतिनिधि, साझेदार, स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में शिक्षार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सफल विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, वहीं संवादात्मक सत्रों के माध्यम से शिक्षार्थियों, सामुदायिक मेंटर प्रेरकों और टीम बालिका के स्वयंसेवकों ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान संघर्ष, दृढ़ता और सामुदायिक सहयोग की प्रेरणादायक कहानियां सामने आईं।
समारोह के मुख्य अतिथि जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी कैलाश चंद्र राठौड़ ने एजुकेट गर्ल्स के पिछले 18 वर्षों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने प्रगति कार्यक्रम की छात्राओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अनेक चुनौतियों को पार कर अपने लक्ष्य हासिल किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक लड़की को शिक्षित करना पूरे परिवार को सशक्त बनाता है।
प्रगति कार्यक्रम से नई उड़ान
कार्यक्रम के दौरान 13 किशोरियों और युवा महिलाओं को राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की कक्षा 10 परीक्षा में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने पर टॉपर्स के रूप में सम्मानित किया गया। ये सभी शिक्षार्थी ‘प्रगति’ कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जो 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग की उन युवतियों को शिक्षा से जोड़ता है, जो किसी कारणवश पढ़ाई से दूर हो गई थीं।
अब तक इस कार्यक्रम के माध्यम से 10,210 से अधिक शिक्षार्थियों ने अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू कर कक्षा 10 उत्तीर्ण की है। यह कार्यक्रम केवल शैक्षणिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन कौशल, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता विकसित करने पर भी जोर देता है।
750 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता
इस समारोह में 750 से अधिक शिक्षार्थियों, 86 प्रेरकों, टीम बालिका स्वयंसेवकों, साझेदारों और सरकारी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कई छात्राओं ने सामाजिक बंधनों, घरेलू जिम्मेदारियों और शिक्षा से लंबे अंतराल जैसी चुनौतियों को पार कर सफलता हासिल की।
कार्यक्रम की विशेष झलक 13 टॉपर्स का सम्मान रहा, जिन्होंने अपने संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कीं। इन कहानियों में सामाजिक बाधाओं को चुनौती देना, घरेलू जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई जारी रखना और अपने सपनों को साकार करना शामिल रहा।
टीम बालिका के स्वयंसेवकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि “मेरा गांव, मेरी समस्या, मैं ही समाधान हूं” के दृष्टिकोण के साथ वे हर लड़की तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं प्रेरकों ने घर-घर जाकर समुदाय को जागरूक करने और लड़कियों के नामांकन में अपनी भूमिका के बारे में जानकारी दी।
यह आयोजन न केवल छात्राओं की उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।
