आजम खां–अब्दुल्ला आजम पैन कार्ड केस: कोर्ट ने मांगे अहम साक्ष्य, 30 मार्च को अगली सुनवाई

रामपुर के बहुचर्चित दो पैन कार्ड मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। हालिया घटनाक्रम में अदालत का रुख काफी सख्त दिखाई दिया है।

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 मार्च की तिथि निर्धारित की है। इससे पहले की कार्यवाही में अभियोजन पक्ष अपनी बहस पूरी कर चुका है और अब बचाव पक्ष को अपनी दलीलें प्रस्तुत करनी हैं।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब और समय नहीं दिया जाएगा। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों से ठोस दस्तावेजी साक्ष्य और मजबूत तर्क पेश करने के निर्देश दिए। माना जा रहा है कि बचाव पक्ष के लिए यह अंतिम अवसर हो सकता है, जिसके बाद अदालत अपना फैसला सुरक्षित रख सकती है।

यह मामला वर्ष 2019 में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना द्वारा दर्ज कराया गया था। आरोप है कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड पाए गए थे—एक में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज थी। आरोप के अनुसार, चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु सीमा पूरी करने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरा पैन कार्ड बनवाया गया।

इस मामले में निचली अदालत ने अक्टूबर 2025 में आजम खां और अब्दुल्ला आजम को 7-7 साल की सजा और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। वर्तमान में यह सुनवाई इसी सजा के खिलाफ दायर अपील पर चल रही है।

अब 30 मार्च की अगली सुनवाई को इस मामले में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद सजा बरकरार रहने या राहत मिलने की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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