नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में तेल और गैस आपूर्ति को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंगलवार देर शाम वरिष्ठ मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। बैठक में मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और कीमतों पर पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर न पड़ने दिया जाए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली, नोएडा समेत कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर कुछ दिक्कतें सामने आई हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए सप्लाई मैनेजमेंट के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
बढ़ते तनाव के बीच सक्रिय हुई सरकार
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और तेल की कीमतों में तेजी के बाद भारत में भी पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी खुद स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि भारतीय उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों या संभावित कमी का सीधा असर न झेलना पड़े।
वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुई बैठक
ऊर्जा स्थिति पर चर्चा के लिए हुई इस बैठक में विदेश मंत्री S. Jaishankar, पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri, वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal भी मौजूद रहे। बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की गई।
ऊर्जा आयात में विविधता की रणनीति
सूत्रों के अनुसार भारत अब ऊर्जा आयात के लिए अपने स्रोतों में विविधता ला रहा है। देश अमेरिका, रूस, वेनेजुएला, ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देशों से भी तेल और गैस की खरीद बढ़ा रहा है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
घरेलू जरूरतों को दी जाएगी प्राथमिकता
सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा हालात में एलपीजी, सीएनजी और पाइप्ड नेचुरल गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी। घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गैस आवंटन में भी बदलाव किया जा रहा है।
