गुस्ताखी माफ हरियाणा -पवन कुमार बंसल
गुरुग्राम की भूमि संबंधी नीति डीएलएफ की मर्जी से चलती रही है। चाहे Bhupinder Singh Hooda हों, Manohar Lal Khattar हों या Nayab Singh Saini
जब हुड्डा ने कहा था – “मैं तो नाम का सीएम हूँ, असली सीएम डीएलएफ है।” तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने एक सार्वजनिक मंच से डीएलएफ को हरियाणा का असली चीफ मिनिस्टर बताया था।
रोहतक में किसान के बेटे भूपिंदर सिंह हुड्डा के दादा चौधरी मातू राम की याद में बन रहे इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए चंदा इकट्ठा किया जा रहा था। DLF Limited ने दो करोड़ रुपये का चेक भेजा था।
अब सुनिए, भूपिंदर हुड्डा ने डीएलएफ की तारीफ में क्या कहा—
“भाई, कहने को तो मैं हरियाणा का चीफ मिनिस्टर हूँ, लेकिन असल में खजाने के चीफ मिनिस्टर तो डीएलएफ वाले हैं।”
समझदार को इशारा काफी था। इसके बाद अफसरशाही भी डीएलएफ के आगे नतमस्तक हो गई।
एचएसआईडीसी (HSIIDC) के एक अफसर ने मनोहर लाल सरकार के दौरान डीएलएफ को करोड़ों रुपये का लाभ देने की एक योजना बनाई थी, लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ सकी।
जब मनोहर लाल ने गुरुग्राम में प्रवासी हरियाणवियों का सम्मेलन किया, तो रात का डिनर गुरुग्राम के गोल्फ क्लब में रखा गया था।
हरियाणा के एक रिटायर्ड मुख्य सचिव ने एक बार कहा था, “पवन, तू तो बिना वजह डीएलएफ के बारे में लिखता है। सरकार चाहे किसी की भी हो, सब ‘डीएलएफ शरणं गच्छामि’।”
