नई दिल्ली। देश की राजधानी में शहरी परिवहन का सबसे बड़ा उदाहरण बनी दिल्ली मेट्रो रोजाना लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर उपलब्ध कराती है। भीषण गर्मी के बावजूद मेट्रो कोच और स्टेशनों के अंदर ठंडक बनी रहती है, जिसे लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि बार-बार दरवाजे खुलने के बावजूद एयर कंडीशनिंग सिस्टम इतनी प्रभावी तरह से कैसे काम करता है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) द्वारा संचालित इस नेटवर्क की कुल लंबाई 352 किलोमीटर से अधिक है और इसमें 250 से ज्यादा स्टेशन हैं। रोजाना करीब 50 लाख यात्री मेट्रो सेवा का उपयोग करते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए मेट्रो कोच और स्टेशनों में अत्याधुनिक एयर कंडीशनिंग और वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है।
मेट्रो कोच में रूफ माउंटेड पैकेज एयर कंडीशनिंग यूनिट लगाई गई हैं, जिनकी कूलिंग क्षमता करीब 12 टन तक होती है। यह सिस्टम 415V AC/3 फेज/50 Hz पावर सप्लाई पर चलता है और औसतन 15.2 किलोवाट बिजली की खपत करता है। इतनी क्षमता के कारण कोच में प्रवेश करने के कुछ ही मिनटों में ठंडक महसूस होने लगती है और यात्रियों को आरामदायक तापमान मिलता है।
मेट्रो के एक कोच में दो या उससे अधिक पैकेज यूनिट लगाए जाते हैं, जो पर्यावरण-अनुकूल रेफ्रिजरेंट R-407C का उपयोग करते हैं। इन यूनिट्स में प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर (PLC) आधारित ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम लगा होता है, जो तापमान को लगातार मॉनिटर करता है और जरूरत के अनुसार कूलिंग को नियंत्रित करता है।
अंडरग्राउंड स्टेशनों में एयर कंडीशनिंग और वेंटिलेशन सिस्टम और भी उन्नत है। यहां CO2 लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। जब यात्रियों की संख्या बढ़ने से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है, तो सिस्टम अपने आप फ्रेश एयर फैन को सक्रिय कर देता है। ये फैन बाहर से ताजी हवा को अंदर लाते हैं, जिसे फिल्टर किया जाता है, जिससे स्टेशन के अंदर हवा का संतुलन बना रहता है और घुटन महसूस नहीं होती।
इस तकनीक का एक बड़ा फायदा ऊर्जा की बचत भी है, क्योंकि फैन केवल जरूरत पड़ने पर ही चलते हैं। DMRC के अनुसार हाल के वर्षों में 5000 से अधिक एसी यूनिट्स की नियमित मेंटेनेंस सुनिश्चित की गई है, ताकि गर्मी के मौसम में भी यात्रियों को ठंडा और आरामदायक सफर मिल सके। दिल्ली मेट्रो की यह आधुनिक व्यवस्था शहर की गर्मी और प्रदूषण से राहत देने में अहम भूमिका निभा रही है।
