औरंगाबाद की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने यूपीएससी में हासिल किया ऑल इंडिया 16वां स्थान, जिले का बढ़ाया मान

  • रिपोर्ट: प्रेम सिन्हा

औरंगाबाद: औरंगाबाद की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में पूरे देश में 16वां स्थान प्राप्त कर अपने परिवार, समाज और जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से औरंगाबाद सहित पूरे बिहार में खुशी और गर्व का माहौल है।

मोनिका श्रीवास्तव जिला मुख्यालय के सत्येन्द्र नगर निवासी ई. बी. के. श्रीवास्तव और भारती श्रीवास्तव की पुत्री हैं। उनके पिता ई. बी. के. श्रीवास्तव वर्तमान में जिला परिषद में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। मोनिका नवबिहार टाइम्स अखबार के संपादक कमल किशोर और सोन वर्षा वाणी अखबार के संपादक श्रीराम अंबष्ट की भगिनी भी हैं।

मोनिका का पारिवारिक परिवेश शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा है। उनके नाना स्व. लाला शम्भूनाथ और दादा स्व. उमेशचंद्र श्रीवास्तव दोनों प्राचार्य और शिक्षाविद् थे, जबकि नानी स्व. अरुणलता सिन्हा और दादी स्व. श्याम कुमारी देवी समाजसेविका थीं।

मोनिका की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर और डीएवी पब्लिक स्कूल से हुई। वे शुरू से ही मेधावी छात्रा रही हैं। आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में उन्होंने बिहार टॉपर का स्थान हासिल किया और वर्ष 2016 में आईआईटी गुवाहाटी से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद उन्होंने कई प्रतिष्ठित वैश्विक कंपनियों में काम किया, लेकिन समाज और देश के लिए कुछ बड़ा करने की चाह ने उन्हें कॉरपोरेट करियर छोड़कर प्रशासनिक सेवा की ओर प्रेरित किया। वर्ष 2022 में उन्होंने बीपीएससी परीक्षा में छठा स्थान प्राप्त कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया।

इसके बाद वर्ष 2024 में पहली बार यूपीएससी परीक्षा में शामिल होकर उन्होंने 455वीं रैंक हासिल की और वर्तमान में भारतीय रेलवे सेवा के अंतर्गत अंडर ट्रेनिंग अधिकारी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। अब दूसरी बार यूपीएससी में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने लंबी छलांग लगाकर ऑल इंडिया 16वां स्थान हासिल किया है।

मोनिका के पिता ई. बी. के. श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी सबसे छोटी पुत्री बचपन से ही असाधारण प्रतिभा की धनी रही है। पढ़ाई के प्रति उसकी लगन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में भी राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।

मोनिका अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार के समर्थन को देती हैं। उनका कहना है कि उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और शिक्षा के महत्व को समझाया। उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी एक अधिकारी बने और समाज के कमजोर व जरूरतमंद लोगों के लिए काम करे, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया।

मोनिका श्रीवास्तव की इस उपलब्धि पर जिले के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उनकी सफलता आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखते हैं।

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