बदायूं, यूपी ;उत्तर प्रदेश की समाजवादी राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो मंचीय भाषणों से नहीं, बल्कि ज़मीन पर किए गए निरंतर संघर्ष और सेवा से अपनी पहचान बनाते हैं। ऐसे ही प्रभावशाली नामों में संतोष कश्यप का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वे एक ऐसी महिला नेता हैं, जिनकी राजनीतिक ताक़त भाषणों से नहीं, बल्कि महिलाओं के विश्वास, संगठन और संघर्ष से निर्मित हुई है। आज समाजवादी पार्टी के महिला वोट बैंक की सबसे मज़बूत कड़ी के रूप में संतोष कश्यप को देखा जाता है।
सेवा से राजनीति तक का सफर
संतोष कश्यप का राजनीति में प्रवेश किसी पूर्व नियोजित रणनीति का हिस्सा नहीं था। 25 दिसंबर 2018 को लोकसभा चुनाव के दौरान सांसद धर्मेंद्र यादव से हुई मुलाक़ात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्हें कश्यप समाज की महिलाओं को संगठित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई और 15 फरवरी 2019 को वे जिला सचिव नियुक्त की गईं। यहीं से समाजवादी राजनीति को महिला शक्ति से जोड़ने का उनका अभियान शुरू हुआ।
पहला सम्मेलन, पहली पहचान
5 मार्च 2019 को आयोजित पहला कश्यप महिला सम्मेलन संतोष कश्यप की संगठन क्षमता का स्पष्ट प्रमाण बना। 1500 से 1600 महिलाओं की उपस्थिति ने यह संदेश दे दिया कि यह केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि उभरते हुए महिला नेतृत्व की दस्तक है। इसके बाद उन्हें छह विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं के बीच समाजवादी पार्टी की नीतियों को पहुँचाने की ज़िम्मेदारी दी गई, जिसे उन्होंने पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ निभाया।
महिला सभा की कमान और ऐतिहासिक सम्मेलन
2021 में संतोष कश्यप को जिला अध्यक्ष महिला सभा बनाया गया। इस दौरान पाँच विधानसभाओं में आयोजित महिला सम्मेलन हज़ारों महिलाओं को पार्टी से जोड़ने में सफल रहे। बदायूं की छठी विधानसभा में आयोजित 4 से 5 हज़ार महिलाओं का ऐतिहासिक सम्मेलन समाजवादी पार्टी के राजनीतिक इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ। यह आयोजन केवल संख्या का नहीं, बल्कि महिला चेतना और राजनीतिक भागीदारी के उभार का प्रतीक बना।
आंदोलन और संघर्ष में अग्रणी भूमिका
जिला अध्यक्ष बनने के बाद संतोष कश्यप हर उस आंदोलन में अग्रिम पंक्ति में रहीं, जहाँ जनता की आवाज़ को सत्ता तक पहुँचाना ज़रूरी था। ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलनों के माध्यम से उन्होंने ज़मीनी मुद्दों को प्राथमिकता दी और पूरी जिला कार्यकारिणी को साथ लेकर संघर्ष किया।
कोरोना काल में मानवता की मिसाल
कोरोना महामारी के दौरान संतोष कश्यप का मानवीय पक्ष सामने आया। जब अधिकांश लोग अपने घरों तक सीमित थे, उस समय वे गरीब और ज़रूरतमंद परिवारों तक दवा, राशन, कपड़े और आर्थिक सहायता लेकर पहुँचीं। विशेष रूप से गरीब महिलाओं की मदद उनके कार्यों का केंद्र रही।
2023 के बाद चौपाल से बदलाव की राजनीति
2023 में दोबारा जिला अध्यक्ष बनने के बाद संतोष कश्यप ने छह विधानसभाओं में लगभग 1500 महिला चौपाल बैठकों का आयोजन किया। प्रत्येक बैठक में 100 से 150 महिलाओं की भागीदारी ने यह साबित किया कि वे केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि महिलाओं के बीच भरोसे और विश्वास का नाम बन चुकी हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के दौरान भी उनकी सक्रिय मौजूदगी जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
महिला नेतृत्व की नई परिभाषा
संतोष कश्यप ने समाजवादी राजनीति में महिला नेतृत्व को एक नई परिभाषा दी है, जहाँ राजनीति सत्ता की नहीं, बल्कि सेवा, संगठन और संवेदनशीलता की अभिव्यक्ति है। आज वे केवल एक पदाधिकारी नहीं, बल्कि हज़ारों महिलाओं की उम्मीद, आवाज़ और ताक़त बन चुकी हैं। समाजवादी पार्टी की मज़बूती और महिला शक्ति की चर्चा में संतोष कश्यप का नाम एक मजबूत आधार के रूप में दर्ज हो चुका है।
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