गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
“इनसे ज़्यादा पंगे न लिया करो, इनके पास रिवॉल्वर होती है; अगर गोली चला देता तो मैं भी क्या करता?” — भजन लाल
यह किस्सा करीब 44 साल पुराना है। कुरुक्षेत्र ज़िले से एक कंबोज साहब, भजन लाल सरकार में मंत्री बने थे। शपथ लेने के बाद जब वे कुरुक्षेत्र पहुँचे, तो संयोग से तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने उन्हें रिसीव करने के लिए उसी थानेदार की ड्यूटी लगा दी, जिससे मंत्री जी पहले से ही खासे खफा थे।
अब मंत्री जी के सिर पर कुर्सी का नशा सवार था। कहते हैं, जब खुदा हुस्न देता है तो नज़ाकत आ ही जाती है। जैसे ही थानेदार ने मंत्री जी को सलाम ठोका, मंत्री जी ने उसे गाली दे दी।
अब जनाब थानेदार का भी खून खौल गया। उसने सबके सामने मंत्री पर हाथ उठा दिया और सीधे अपने पुलिस अधीक्षक के पास जाकर पेश हो गया। पुलिस अधीक्षक साहब काफ़ी भोले-भाले किस्म के थे। उनकी इसी कमजोरी का फ़ायदा उठाते हुए थानेदार ने कह दिया—
“जनाब, मंत्री जी कह रहे थे कि तेरी ड्यूटी किस बेवकूफ़ ने लगाई है?”
बस, फिर क्या था। पुलिस अधीक्षक अपने थानेदार के बचाव में आ गए।
मामला मुख्यमंत्री भजन लाल तक पहुँचा। उन्होंने तो ग़ज़ब ही कर दिया। थानेदार को निलंबित तो किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद बहाल भी कर दिया। साथ ही मंत्री को साफ़ सलाह दे दी—
“इनसे, यानी पुलिस वालों से, बेवजह पंगे मत लिया करो। इनके पास रिवॉल्वर होती है। अगर गोली चला देता, तो मैं भी क्या करता?”
ऐसे ही कई रोचक और चटपटे किस्से मेरी आने वाली किताब
‘ख़ाकी के सतरंगे किस्से’ में पढ़ने को मिलेंगे।
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