“संजय की भूमिका में हरियाणा को आईना दिखाता एक कलमकार”

गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा-पवन कुमार बंसल

हरियाणा महाभारत की धरती है, इसलिए संजय की भूमिका निभाकर धृतराष्ट्रों को आईना दिखा रहा हूँ।

मुझे न नेता बनना है और न कोई चुनाव लड़ना है। मैं हरियाणा में पैदा हुआ हूँ। यहाँ का जवान देश की रक्षा के लिए कुर्बानी देता है और किसान अन्न उगाता है। यह प्रदेश दिल्ली से जुड़ा हुआ है। अगर मुख्यमंत्री ईमानदारी से काम करे, तो यहाँ बहुत कम टैक्स लगाना पड़े।

पिछले पचास वर्षों से संजय की भूमिका में धृतराष्ट्रों को आईना दिखा रहा हूँ, लेकिन धृतराष्ट्र पुत्र-मोह और परिवार-मोह में अंधे बने हुए हैं।

हरियाणा के हालात देखकर दिल रो पड़ता है। इसलिए सत्तर वर्ष की उम्र में भी—हार्ट पेशेंट होने, प्रोस्टेट ग्लैंड की बीमारी और शुगर बॉर्डर-लाइन पर होने के बावजूद—रात ग्यारह बजे सोकर सुबह तीन बजे उठता हूँ और सारा दिन कलम घसीटता हूँ।

मैं चाणक्य बनना चाहता हूँ, लेकिन कोई चंद्रगुप्त नहीं मिल रहा।

अब चाणक्य की भूमिका में आकर किसी ऐसे चंद्रगुप्त की तलाश में हूँ, जो प्रदेश का भला करे, ताकि मैं बुढ़ापे में कुछ आराम कर सकूँ।

 

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