दुनिया की महाशक्तियां बजट में कहां कर रही हैं निवेश, भारत के लिए क्या हैं सबक

भारत सरकार द्वारा 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश किए जाने के बाद देशभर में किसान, मिडिल क्लास और टैक्स स्लैब को लेकर चर्चाएं तेज हैं। लेकिन इसी बीच यह सवाल भी अहम है कि दुनिया की अन्य महाशक्तियां जैसे अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन अपना बजट किन क्षेत्रों में खर्च कर रही हैं और भारत उनके अनुभवों से क्या सीख सकता है।

1 फरवरी 2026 को पेश हुए भारतीय बजट के संदर्भ में अगर दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बजट गणित को समझा जाए, तो कई अहम सबक सामने आते हैं।

अमेरिका: रक्षा और कर्ज का भारी बोझ
अमेरिका का बजट दुनिया में सबसे बड़ा है, जो लगभग 7.3 ट्रिलियन डॉलर का है। बजट का बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा और मेडिकेयर पर खर्च होता है, जबकि सैन्य शक्ति पर भी अमेरिका का खास जोर है। चीन से मुकाबले के लिए मिसाइल डिफेंस सिस्टम और साइबर युद्ध की तैयारियों पर अरबों डॉलर झोंके जा रहे हैं। हालांकि, अमेरिका इस समय भारी कर्ज के बोझ तले दबा है। स्थिति यह है कि कर्ज के ब्याज पर होने वाला खर्च लगभग उसके रक्षा बजट के बराबर पहुंच चुका है। अमेरिका के अनुभव से भारत को यह सबक मिलता है कि कर्ज लेकर विकास की भी एक सीमा होती है और भविष्य को सुरक्षित रखना जरूरी है।

चीन: तकनीक और आत्मनिर्भरता पर फोकस
चीन का बजट करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का है, जो पूरी तरह भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित है। अमेरिका को पीछे छोड़कर सुपरपावर बनने के लक्ष्य के तहत चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चिप मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी में भारी निवेश कर रहा है। उद्योगों को सब्सिडी देकर वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपनाई जा रही है। साथ ही, बूढ़ी होती आबादी को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं पर भी खर्च बढ़ाया जा रहा है। इससे भारत के लिए संदेश साफ है कि उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं को और मजबूत कर ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ाई जा सकती है।

जापान: बुजुर्ग आबादी और सुरक्षा की चिंता
जापान का बजट लगभग 770 बिलियन डॉलर का है। देश दो बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है—तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे। जापान ने अपने शांतिवादी इतिहास से हटकर रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है और लंबी दूरी की मिसाइलों व ड्रोन तकनीक में निवेश बढ़ाया है। बजट का बड़ा हिस्सा बुजुर्गों की पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होता है। जापान के अनुभव से भारत को यह सीख मिलती है कि युवा आबादी का लाभ उठाते हुए अभी से टिकाऊ स्वास्थ्य और पेंशन व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

जर्मनी: बजटीय अनुशासन और सेना का आधुनिकीकरण
जर्मनी को बजटीय अनुशासन के लिए जाना जाता है। वह अत्यधिक कर्ज लेने के खिलाफ सख्त रुख रखता है। यूक्रेन युद्ध के बाद जर्मनी ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर बड़ा निवेश किया है। इसके साथ ही ऊर्जा परिवर्तन पर जोर दिया जा रहा है ताकि तेल-गैस के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम हो सके। जर्मनी ने बाहरी सहायता में कटौती कर यूरोपीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

यूनाइटेड किंगडम: स्वास्थ्य सेवा सबसे बड़ी चुनौती
ब्रिटेन का बजट करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर का है। वहां सरकार की सबसे बड़ी चुनौती नेशनल हेल्थ सर्विस को संभालना है, जिस पर बजट का बड़ा हिस्सा खर्च होता है। टैक्स बढ़ाकर अस्पतालों और डिजिटल हेल्थ सेवाओं को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। रक्षा पर भी खर्च बढ़ा है, लेकिन जनता की सेहत अब भी शीर्ष प्राथमिकता बनी हुई है।

भारत के लिए संदेश
दुनिया की इन अर्थव्यवस्थाओं के बजट से स्पष्ट है कि समय और परिस्थितियों के साथ प्राथमिकताएं बदलती रहती हैं। अमेरिका और जापान रक्षा पर, चीन तकनीक पर और यूरोप स्वास्थ्य व सुरक्षा पर जोर दे रहा है। भारत के लिए यह जरूरी है कि बजट केवल लोक-लुभावन घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि रक्षा में आत्मनिर्भरता, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली के बीच संतुलन बनाकर दीर्घकालिक विकास की दिशा तय की जाए।

 

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