किसानों की अनदेखी का बजट! महंगे कृषि यंत्र, बढ़ती लागत और अधूरे वादों ने बढ़ाई चिंता

रामपुर। पेश किए गए केंद्रीय बजट से देश के छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी निराशा हाथ लगी है। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष वीरेश शर्मा ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें किसानों की जमीनी समस्याओं की अनदेखी की गई है, जिससे अन्नदाता की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

वीरेश शर्मा ने कहा कि कृषि यंत्रों पर अधिक जीएसटी लगाए जाने से खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं किसान सम्मान निधि जैसी महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी रूप से आगे नहीं बढ़ाया गया, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि केसीसी कार्ड की सीमा पांच लाख रुपये तक बढ़ाने की घोषणा तो की गई, लेकिन उसका वास्तविक क्रियान्वयन अभी तक धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है।

किसानों का आरोप है कि बजट में खाद, बीज और डीज़ल जैसी आवश्यक कृषि आदानों की लगातार बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस राहत की घोषणा नहीं की गई। यदि इन आदानों की कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण किया जाता, तो किसानों को सीधा और वास्तविक लाभ मिल सकता था। वर्तमान में महंगाई की मार झेल रहे किसानों के लिए यह बजट राहत देने के बजाय अतिरिक्त बोझ साबित हो रहा है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती की लागत निरंतर बढ़ रही है, लेकिन उनकी आय बढ़ाने के लिए बजट में ठोस और व्यावहारिक कदमों का अभाव है। ऐसे में किसानों की उम्मीदों को इस बजट से करारा झटका लगा है।

भारतीय किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि वह शीघ्र ही कृषि यंत्रों पर जीएसटी में कटौती करे, केसीसी सीमा वृद्धि का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित करे तथा खाद, बीज और डीज़ल जैसे कृषि आदानों की कीमतों पर नियंत्रण के लिए ठोस निर्णय ले, ताकि अन्नदाता को वास्तविक राहत मिल सके।

 

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