एचपीएससी के चेयरमैन आलोक वर्मा से सब दुखी, उनका बचाव किया एक्स सीएम भूपिन्दर सिंह हूड़ा ने…

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी यू ही तो कोई बेवफ़ा नहीं होता

गुस्ताखी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

हमारे जागरूक पाठक राजीव वत्स के सौजन्य से।

एचपीएससी के चेयरमैन आलोक वर्मा से सब दुखी हैं—उनका बचाव एक्स सीएम भूपिन्दर सिंह हूड़ा ने किया। आलोक वर्मा की व्हाट्सएप चैट हुड्डा साहब के हाथ में थी। HPSC का डिप्टी सेक्रेट्री नागर करोड़ों कैश के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया था, वो भी अपने दफ़्तर में।

उस समय आलोक वर्मा को न सिर्फ हटवाया जा सकता था, बल्कि उस पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के अंतर्गत आपराधिक मुक़दमा भी दर्ज करवाया जा सकता था।

तब तो हुड्डा साहब ने आलोक वर्मा की जांच के लिए व्हाट्सएप चैट सरकार को दी नहीं और आज कह रहे हैं कि आलोक वर्मा को हटाओ। हुड्डा साहब बताएं, आज सरकार आलोक वर्मा को कौन से कानून के तहत हटाए?

दरअसल, पक्ष ही विपक्ष है और विपक्ष ही पक्ष है।
जनता फालतू में लड़ती रहती है।

भाजपा ने 2014 में चुनावी घोषणा के बावजूद हुड्डा साहब के चेले, तत्कालीन HPSC चेयरमैन भड़ाना को अभयदान दिया और हुड्डा साहब ने व्हाट्सएप चैट हाथ में होने के बावजूद खट्टर साहब के आलोक वर्मा को अभयदान दिया। चैट में क्या है, पढ़िए—दुम्छला।

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी (हुड्डा साहिब) कि यूँ ही तो कोई बेवफ़ा नहीं होता।

जब कांग्रेस के विधायक डॉ. रघुबीर सिंह कादियान ने असेंबली में यह मामला उठाया, तो तत्कालीन सीएम मनोहर लाल ने जेब से गीता निकालकर उसकी क़सम खाते हुए कहा था कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। विजिलेंस ब्यूरो ने भी चैट का मामला दबा दिया, क्योंकि अगर मामला खुलता तो आँच मनोहर लाल पर आती।

बक़ौल शायर—
“मेरे कलाम से बेहतर है मेरी ख़ामोशी,
न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली।
किसी ने अपना सफ़ीना डुबो के साहिल में,
हज़ारों डूबने वालों की आबरू रख ली।”

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