ऐलनाबाद, 21 जनवरी (एम पी भार्गव): गुरुद्वारा श्री जीवन नगर में वर्तमान नामधारी सतगुरू, ठाकुर दलीप सिंह जी की प्रेरणा से सतगुरू तेग बहादुर जी की शहीदी शताब्दी को समर्पित विशाल हवन यज्ञ समारोह हो रहे हैं। यह यज्ञ 1 माघ (14 जनवरी) से आरंभ हुए एवं 10 माघ (23 जनवरी) बसंत पंचमी वाले दिन समाप्त होंगे।
इस पवित्र आयोजन में विश्व शांति व कल्याण के लिए, जहां नामधारी सिख 350 हवन कर सतगुरू तेग बहादुर जी को श्रद्धांजलि अर्पण कर रहे हैं; वहीं सनातनी संप्रदाय, नौ महान व्यक्तित्व, विश्व हिंदू परिषद, आर.एस.एस. और कई अन्य धार्मिक और सामाजिक संगठन भी हवन में सम्मिलित हो रहे हैं। नामधारी सिखों द्वारा 300 से अधिक हवन हो चुके हैं।
सनातन हिन्दू संप्रदायों द्वारा आज जीवन नगर में 21 अखंड हवन यज्ञ हो रहे है. आज के समय में, जब कुछ तत्व सनातन धर्म को तोड़ने और विकृत करने का प्रयास कर रहे हैं, यह हवन यज्ञ धार्मिक एकता और साझा विचारों का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। सतगुरू नानक देव जी ने हवन संबंधी लिखा है “वुठै घाहु चरहि निति सुरही साधन दही बिलोवै| तितु घिइ होम जगु सदा पूजा पईए कारज सोहै (पन्ना 150)।
भाई गुरदास जी ने भी लिखा है “भाउ भगति परवाण है, जग होम ते पुरब कमाई”, “घिअ ते होवनि होम जग ढंग सुआरथ चज अचारा”। ठाकुर दलीप सिंघ जी भी हवन संबंधी वचन करते हुए अक्सर बताते हैं कि जो सज्जन यह कहते हैं “हवन करना हिंदुओं का कार्य है, सिखों का नहीं”, उन्हें यह पता होना चाहिए कि अमृतपान करना भी हिंदुओं का ही है।
“अमृत” शब्द भी हिंदुओं से आया है। अमृत बनाने और अमृतपान करने की परंपरा भी हिंदुओं की है, हालांकि उस का तरीका अलग है। सिख पंथ की कई परंपराएं, जैसे: गुरु सिख परंपरा, चरणामृत देना-लेना, ब्रह्म ज्ञान, धर्म, मुक्ति आदि, ऐसी शब्दावली और ऐसी मर्यादा; हिंदुओं से ही सिखों में आई है। सिख पंथ के मूल सिद्धांत हिंदूओं वाले हैं। सिखों की अधिकतर परंपराएं और मर्यादा का आधार भारतीय संस्कृति और हिंदू ही हैं, क्योंकि हमारा सिख पंथ ‘हिंदुओं’ से बना है। हमारे गुरु साहिबान हिंदू परिवारों में ही प्रकट हुए थे, हिंदू परिवारों में ही विवाह किए थे।
हमारे गुरु साहिबान के नाम भी हिंदुओं के ही थे। इस लिए, यदि हवन करने की हिंदूओं वाली परंपरा एवं मर्यादा, नामधारी सिख कर रहे हैं; तो उस में कोई गलत बात नहीं है। नामधारी गुरुद्वारा समिति श्री जीवन नगर द्वारा आयोजित चल रहे महान यज्ञ में रानियां के श्री दुर्गा सकीर्तन मण्डल, श्री हनुमान मन्दिर, श्री गणेश मन्दिर, श्री सालासर धाम सेवा समिति, श्री खाटूश्याम मन्दिर, मुलतान सभा चैरिटेबल ट्रस्ट, श्री श्यामसखा मण्डल, बजरंग सेवा समिति, श्री दीवान मण्डल, श्री गऊशाला कमेटी, पूर्वाचंल छठ सेवा समिति, सेवा भारती, श्री ब्रह्मणी मन्दिर, श्री सालासर पैदल यात्री संघ, अखिल भारतीय अरोड़ा एकता परिवार, बाबा बिश्वकर्मा गुरूद्वारा, युवा शक्ति जागृत कल्ब, श्री जैन सभा एवं श्री भगवती सेवा समिति ने भाग लिया|
