Delhi Pollution: 2025 की सर्दियों में दिल्ली बनी गैस चैंबर, वायु प्रदूषण ने तोड़े पिछले एक दशक के रिकॉर्ड

Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट से गुजर रही है। साल 2025 की सर्दियां दिल्लीवासियों के लिए दोहरी मार साबित हो रही हैं। एक ओर कड़ाके की ठंड ने जनजीवन प्रभावित किया है, तो दूसरी ओर जहरीली हवा ने पूरे दिल्ली-एनसीआर को गैस चैंबर में तब्दील कर दिया है।

सुबह और शाम के समय घना कोहरा और प्रदूषण का घातक मिश्रण दृश्यता को लगभग शून्य कर रहा है। इसका असर न केवल सड़क, रेल और हवाई यातायात पर पड़ रहा है, बल्कि लोगों को सांस लेने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 की सर्दियों में प्रदूषण का स्तर पिछले कई वर्षों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक हो चुका है।

दिसंबर में रिकॉर्डतोड़ प्रदूषण
सेंटर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़े बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। दिसंबर की शुरुआत से ही दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब और बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है। दिसंबर के पहले 18 दिनों में दिल्ली ने पिछले आठ वर्षों का सबसे खराब औसत AQI दर्ज किया है। 14 दिसंबर को AQI 461 तक पहुंच गया, जिसे स्वास्थ्य के लिहाज से आपातकालीन स्थिति माना जाता है।

स्थानीय प्रदूषण स्रोत बने बड़ी वजह
2025 में प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह स्थानीय स्रोतों का बढ़ता योगदान है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कुल प्रदूषण में लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी स्थानीय स्रोतों की है। इनमें सबसे बड़ा योगदान वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का है, जो स्थानीय प्रदूषण का करीब 53 प्रतिशत हिस्सा है। सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या और लंबे ट्रैफिक जाम ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।

टेंपरेचर इनवर्जन ने बढ़ाई परेशानी
इस साल मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने प्रदूषण को और घातक बना दिया है। गिरते तापमान के साथ ‘टेंपरेचर इनवर्जन’ की स्थिति पैदा हो गई है। इस स्थिति में जमीन के पास ठंडी हवा की परत प्रदूषकों को ऊपर जाने से रोक लेती है, जिससे धूल और जहरीली गैसें शहर के ऊपर ही फंसी रहती हैं। हवा की धीमी रफ्तार के कारण प्रदूषण छंट नहीं पा रहा है।

पटाखों और निर्माण कार्यों का असर
दिवाली के बाद से शुरू हुआ प्रदूषण का सिलसिला अब तक थम नहीं पाया है। अक्टूबर के अंत में PM2.5 का स्तर सुरक्षित सीमा से करीब 30 गुना अधिक पहुंच गया था। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, मेट्रो निर्माण और रियल एस्टेट से उड़ने वाली धूल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कई निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों की अनदेखी भी प्रदूषण बढ़ाने का बड़ा कारण बन रही है।

कुल मिलाकर, 2025 की सर्दियां दिल्ली के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आई हैं, जहां प्रदूषण अब केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है।

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