वाराणसी में भगवान काशी विश्वनाथ के दर्शन और शहर भ्रमण अब और आसान होने वाला है। शहर में तेजी से बढ़ रही भीड़ और संकरी गलियों की समस्या को देखते हुए रोपवे परियोजना पर जोर-शोर से काम चल रहा है। यह परियोजना न केवल यात्रियों की आवाजाही तेज करेगी बल्कि शहर के ट्रैफ़िक दबाव को भी काफी कम करेगी। रोपवे कारों में प्रतिदिन एक लाख तक लोग यात्रा कर सकेंगे।
मुख्य बातें (Highlights)
वाराणसी में मई 2026 तक रोपवे सेवा शुरू होने की संभावना।
कुल परियोजना लागत लगभग 800 करोड़ रुपये।
लगभग 4 किलोमीटर लंबे रूट पर चलेगी रोपवे, सफर केवल 15–20 मिनट में पूरा होगा।
देश में रोपवे प्रोजेक्ट्स का विस्तार
देश के कई राज्यों—जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर—में रोपवे निर्माण तेजी से हो रहा है। अब मैदानी इलाकों में भी रोपवे की अवधारणा लागू की जा रही है, ताकि शहरों में आवागमन और पर्यटन को नई दिशा मिल सके। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष प्राथमिकता वाले शहर वाराणसी में यह महत्वाकांक्षी रोपवे प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है।
वाराणसी रोपवे रूट और योजना
यह रोपवे वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से काशी विश्वनाथ मंदिर तक लोगों को तेज और सुगम यात्रा का विकल्प देगा। हर साल दो लाख से अधिक तीर्थयात्री और पर्यटक शहर पहुंचते हैं, जिससे ट्रैफ़िक और भीड़ की समस्या बढ़ जाती है।
मंडलायुक्त के अनुसार, संकरी गलियों और घनी आबादी के चलते मेट्रो निर्माण संभव नहीं था, इसलिए रोपवे को व्यावहारिक समाधान माना गया।
परियोजना की लागत
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। शहर में चलने वाली यह भारत की पहली शहरी रोपवे सेवा होगी।
रूट की लंबाई और यात्रा समय
रोपवे कुल 4 किलोमीटर लंबाई में चलेगी। इसमें
सफर को पूरा करने में 15 से 20 मिनट लगेंगे।
यह सेवा शहर के प्रमुख पर्यटन मार्ग को बेहद आसान और तेज बनाएगी।
किराया और क्षमता
रोपवे यात्रा का टिकट 50 से 100 रुपये के बीच होने की संभावना।
इसमें 148 गोंडोला (केबल कार) होंगी।
हर गोंडोला में 10 यात्री बैठ सकेंगे।
अनुमान है कि प्रतिदिन 1 लाख लोग इस सुविधा का लाभ उठा पाएंगे।
