देश के लोकप्रिय कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय अपने प्रवचनों, भजनों और मधुर वाणी के कारण लोगों के दिलों में एक खास जगह बना चुके हैं। हाल ही में हरियाणा की शिप्रा के साथ उनकी शादी भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही। धार्मिक कथाओं के माध्यम से लोग उन्हें बड़ी श्रद्धा से सुनते हैं।
कौन हैं कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय?
भारत के प्रसिद्ध कथावाचकों में इंद्रेश उपाध्याय का नाम प्रमुखता से शामिल है। उनकी शैली, भजन और ज्ञानवाणी लोगों को गहराई से प्रभावित करती है। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होते हैं, जिनमें वे धर्म, भक्ति और शास्त्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हैं।
कलियुग से जुड़ी बातें – इंद्रेश उपाध्याय का कथन
एक पॉडकास्ट में जब उनसे पूछा गया कि कलियुग की शुरुआत कब हुई और लोग कैसे पहचानें कि कलियुग चल रहा है, तब उन्होंने भागवत पुराण के आधार पर इसका विस्तार से उत्तर दिया।
कलियुग की शुरुआत कब हुई?
इंद्रेश उपाध्याय कहते हैं कि जब भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी लोक से अपने धाम लौटे, उसी दिन से कलियुग की शुरुआत हो गई।
भागवत पुराण में वर्णन मिलता है कि राजा परीक्षित को मार्ग में स्वयं कलियुग मिला था।
जब परीक्षित ने पूछा—“तुम कौन हो?”
तब उसने जवाब दिया—“मैं कलियुग हूं, और मेरी शुरुआत उसी दिन से हो गई जब श्रीकृष्ण अपने धाम गए।”
यह सुनकर राजा परीक्षित भी अचंभित रह गए, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि अभी द्वापर युग चल रहा है।
क्या कलियुग में भगवान को प्रसन्न करना आसान है?
इंद्रेश उपाध्याय बताते हैं कि कलियुग में ठाकुर जी अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं।
कलियुग में मनुष्य की आयु केवल 100 वर्ष निर्धारित है, लेकिन बदलते जीवनशैली के कारण अधिकांश लोग इससे पहले ही जीवन समाप्त कर बैठते हैं।
इस युग में लोग अधिक पाप करते हैं, परंतु एक बार भगवान का नाम लेने मात्र से भी उनके जीवन का उद्धार संभव है।
भागवत पुराण के अनुसार—कलियुग इन 5 स्थानों पर रहता है
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय भागवत महापुराण का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि कलियुग पांच स्थानों पर निवास करता है—
जुआ
मदिरा पान या दूषित भोजन
परस्त्री या परपुरुष गमन
हिंसा, कलह और क्लेश
गलत तरीके से कमाया गया धन
इन्हीं स्थानों पर कलियुग का अधिक प्रभाव देखा जाता है।
कलियुग का प्रभाव क्या होता है?
इंद्रेश उपाध्याय बताते हैं कि जब कलियुग का प्रभाव बढ़ता है, तब—
लोग माता-पिता का अनादर करने लगते हैं
रिश्तों में दूषित भाव बढ़ जाता है
लोग धन का दुरुपयोग करते हैं
मदिरापान और पाप कर्म बढ़ जाते हैं
कलियुग में धर्म, सदाचार और नैतिकता में कमी आना स्वाभाविक माना जाता है।
डिस्क्लेमर- यहां दी गई जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। khabrejunction.com इनकी पुष्टि नहीं करता।
