देश में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपने रहस्यों और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हैं। महाराष्ट्र के जेजुरी में स्थित खंडोबा मंदिर भी इन्हीं मंदिरों में से एक है, जहाँ भक्त भगवान शिव के मार्तंड भैरव स्वरूप के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं। माना जाता है कि भगवान के दर्शन तब तक अधूरे माने जाते हैं, जब तक भक्त राक्षस मणि के दर्शन नहीं कर लेते।
यह मान्यता एक पौराणिक कथा से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब ब्रह्मा पृथ्वी की रचना कर रहे थे, तो उनकी पसीने की बूंद से मल्ल और मणि नामक राक्षस उत्पन्न हुए। दोनों राक्षसों ने धरती पर उत्पात मचाना शुरू कर दिया और अनेक निर्दोष लोगों की हत्या कर दी।
भक्तों ने भगवान शिव से प्रार्थना की। अपने भक्तों को बचाने के लिए भगवान शिव खंडोबा या मार्तंड भैरव रूप में प्रकट हुए और मल्ल राक्षस का वध किया। अपने भाई की मृत्यु देखकर मणि ने भगवान शिव के सामने आत्मसमर्पण किया और क्षमा मांगी। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने मणि को क्षमा किया और उसे मंदिर में स्थान भी दिया।
खंडोबा मंदिर में भगवान शिव के मार्तंड भैरव रूप की पूजा होती है। इस रूप में भगवान शिव योद्धा अवतार में हैं और उनके हाथ में बड़ी तलवार है। मार्तंड भैरव घोड़े पर सवार होकर भक्तों की रक्षा करते हैं और अपने उग्र रूप से बुरी शक्तियों का नाश करते हैं।
भगवान की विजय और शत्रुओं पर विजय की स्मृति में मंदिर में हर साल दिसंबर में हल्दी की होली खेली जाती है और भगवान को हल्दी अर्पित की जाती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर राक्षस मणि की छोटी प्रतिमा भी विराजमान है। इसके अलावा, 42 किलो वजन की तलवार उठाने की प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है, जिसे भगवान शिव ने राक्षसों के संहार में प्रयोग किया था, ऐसा माना जाता है।
लोकमान्यता के अनुसार, यदि विवाह में देरी हो रही है या संतान सुख की कामना है, तो इस मंदिर में हर मनोकामना पूरी होती है। इसलिए भक्त दूर-दूर से यहाँ भगवान शिव के योद्धा अवतार के दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं।
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