फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ दी जा रही प्रोत्साहन राशि
- कृषि विभाग की टीमें खेतों में पहुंच कर किसानों को पराली न जलाने व फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कर रही प्रेरित
ऐलनाबाद,सिरसा, 30 अक्टूबर(एम पी भार्गव): कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की टीमें प्रतिदिन गांवों में पहुंच कर आमजन को पराली न जलाने व फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रेरित कर रही है। वीरवार को टीमों ने केवल, नटार, पोहडक़ां, झोरडऩाली, भुर्टवाला, मोडियाखेड़ा, मोजुखेड़ा, शाहपुर बेगु, कुमथल, सिकंदरपुर, ओढां, आनंदगढ, गदराना, अबूबशहर, नाथूसरी कलां, दड़बाकलां, देसूजोधा, नटार, निलांवाली, फुल्लो, बड़ागुढा, दौलतपुर खेड़ा, मल्लेकां, मलड़ी, झोरडऩाली, टप्पी, उमेदपुरा आदि गांवों में पहुंच कर आमजन को जागरूक किया।
कृषि विभाग के उप निदेशक डा. सुखदेव सिंह ने बताया कि पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होने के साथ-साथ भूमि में मौजूद मित्र कीट भी नष्टï हो जाते हंै। किसान धान के फसल अवशेषों से पशुओं के लिए चारा भी बना सकते हंै तथा उचित प्रबंधन कर अतिरिक्त आय भी कमा सकते हंै। हरियाणा सरकार पराली न जलाने वाले किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत प्रति एकड़ 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को पराली को जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे पर्यावरण की रक्षा हो सके।
इसके अलावा पराली की गांठे बनाकर भी अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं। जागरूकता कार्यक्रम में बताया गया कि पराली में आग लगाने से अनेक ऐसे जीव है जो खेत से बाहर नहीं निकल पाते और आग की चपेट में आकर नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा आग लगाने से पेड़ पौधों को भी नुकसान पहुंचता है, यदि पराली को खेत में ही मिला दिया जाए तो यह खेती की उर्वरा शक्ति को बढाने में कारगर है।
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति पराली में आगजनी की घटना करते पाए गए तो एक एकड़ भूमि तक पांच हजार रुपये प्रति घटना, दो से पांच एकड़ भूमि तक दस हजार रुपये प्रति घटना व पांच एकड़ भूमि से ज्यादा पर तीस हजार रुपये प्रति घटना के हिसाब से जुर्माना वसूल किया जाएगा व एफआईआर दर्ज की जाएगी।
