लखनऊ: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में इस बार राज्य सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू की है। अब शादी समारोह में वर-वधू को वरमाला पहनाने से पहले बायोमेट्रिक और फेस आईडी वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है। यह कदम योजना में गड़बड़ी और फर्जी लाभ उठाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है।
समाज कल्याण विभाग ने शुरू की तैयारियां
इस वर्ष के सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए समाज कल्याण विभाग ने सभी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। योजना के तहत अब प्रत्येक कन्या के विवाह पर 1 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इसमें 60 हजार रुपये सीधे बेटी के खाते में, 25 हजार रुपये विवाह से संबंधित सामान पर और 15 हजार रुपये आयोजन पर खर्च किए जाएंगे।
154 आवेदन प्राप्त
अब तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से कुल 154 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिले और विवाह कार्यक्रम पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ आयोजित हों।
डिजिटल निगरानी को मिलेगा बल
राज्य सरकार की यह पहल समाज कल्याण के साथ-साथ डिजिटल निगरानी प्रणाली को भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल फर्जीवाड़े पर नियंत्रण होगा, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता सटीक रूप से पहुंच सकेगी।
